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नैनीताल में बंदर बता रहे मौसम का हाल

Mon, 23 Dec 2013 12:40 PM IST
विजेंद्र श्रीवास्तव/ अमर उजाला, हल्द्वानी
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कड़ाके की ठंड पड़ने वाली है। यह पूर्वानुमान मौसम विभाग का नहीं, बल्कि यह संकेत नैनीताल में बंदरों और लंगूरों के खाने में आए बदलाव से मिले हैं।
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सदियों से मानी जाती है यह बात
अनुभव एवं वन्यजीव व्यवहारों के आधार पर डब्ल्यूआईआई वैज्ञानिक और जंगलात के अफसरों का भी यही अनुमान है। उनके अनुसार जब कड़ाके की ठंड पड़ने की आशंका होती है तो बंदर काफी मात्रा में वसा, प्रोटीन से भरपूर बांज के बीज खाना शुरू कर देते हैं।

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ताकि अगर ठंड में खाना कम भी मिले तो उससे जमा फैट से काम चल सके। मौसम में होने वाले बदलावों का संकेत पशु-पक्षी पहले ही भांप लेते हैं। यह बात सदियों से मानी जाती रही है।
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ऐसे ही कुछ अनुभव के आधार पर जंगलात भी मौसम का पूर्वानुमान लगाता है। इस बार भीषण ठंड शुरू होने का संकेत बंदरों से मिला है। नैनीताल आदि जगहों जहां बांज के पेड़ हैं, वहां बंदर इन दिनों इसके बीजों को खूब खा रहे हैं।

यह बात वैज्ञानिक भी मानते हैं
वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया देहरादून के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विभाष पांडव कहते हैं कि बंदरों और लंगूरों के बांज के बीजों को ज्यादा खाना इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में कड़ाके की ठंड पड़ने वाली है।

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उन्होंने बताया कि बांज के बीजों में वसा, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट आदि ज्यादा पाया जाता है। इसे खाकर बंदर आने वाले प्रतिकूल मौसम के लिए तैयारी करते हैं।

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डीएफओ डॉ. पराग मधुकर धकाते कहते हैं कि बांज के पेड़ पर बीज नवंबर में आते हैं और दिसंबर तक पकते हैं। इस समय नैनीताल में जहां-जहां बांज के पेड़ हैं वहां बंदर और लंगूरों के झुंड आसानी से इनके बीज खाते हुए दिख जाएंगे।
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बंदरों के इस व्यवहार से हमें अंदाजा हो जाता है कि अब ठंड बढ़ने वाली है। ठंड और बर्फबारी होने पर खाना मिलना मुश्किल होगा।

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ऐसे में वह अपने शरीर में वसा आदि की मात्रा को बढ़ाते हैं ताकि आगामी दो महीने जब खाने का संकट होगा तो बांज के बीज से शरीर में जमा वसा से काम चलाया जा सके। हम इस व्यवहार के अध्ययन की भी योजना बना रहे हैं।
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