गैरसैंण के विधान भवन के लिए आखिरकार 25 करोड़ रुपए जारी कर दिए गए हैं। पहले चरण में शासन ने 64.52 करोड़ रुपए के खर्च को स्वीकृति दी है।
नाराजगी के बाद शासन हरकत में आया
विधानसभा उपाध्यक्ष एके मैखुरी की नाराजगी जाहिर होने के बाद मंगलवार को शासन हरकत में आया। हालांकि अब विधानभवन के निर्माण के काम की देखरेख विधानभवन की बजाय शासन के पास है।
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सरकार ने नौ मई 2012 को गैरसैंण में विधानभवन के निर्माण की घोषणा की थी। विधानसभा की मांग को देखते हुए भराड़ीसैंण में 100 एकड़ जमीन विधानसभा सचिवालय के नाम स्थानांतरित भी कर दी गई।
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सरकार ने बाद में विधान भवन के निर्माण का जिम्मा नेशनल बिल्डिंग कारपोरेशन को भी सौंपा। नौ नवंबर 2013 को गैरसैंण में बाकायदा विधानभवन का भूमि पूजन किया गया।
विजय बहुगुणा से मामले की शिकायत
हद तो यह हुई कि विधानभवन के निर्माण का जिम्मा नेशनल बिल्डिंग कॉरपारेशन को सौंप तो दिया गया पर इसके लिए एनबीसी को पैसा रिलीज नहीं किया गया। इसी बात से नाराज कर्णप्रयाग विधायक और विधानसभा उपाध्यक्ष एके मैखुरी ने मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से मामले की शिकायत भी की थी।
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मैखुरी का साफ कहना था कि जनभावनाओं के अनुरूप अगर सरकार ने फैसला किया है तो उसे अमल में लाना भी सरकार की जिम्मेदारी है। मैखुरी की नाराजगी जताने के बाद मंगलवार को शासन ने 25 करोड़ रुपए निर्माण कार्य के लिए जारी भी कर दिया।
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एके मैखुरी के मुताबिक पहले चरण में 64.52 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस शासनादेश के जारी होने के बाद मैखुरी की नाराजगी भी कम हुई है। मैखुरी का कहना है कि अब निर्माण कार्य भी तुरंत ही शुरू होना चाहिए।