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छोड़ दीजिए मोबाइल टॉवर से डर, नहीं निकलता रेडिएशन

Thu, 30 Jun 2016 11:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून

सार

  • स्वास्थ्य के लिए खतरनाक नहीं है मोबाइल तरंगे
  • दूरसंचार मंत्रालय चला रहा जागरूकता अभियान
  • सचिव ने बताया, 25 हजार से ज्यादा हुई स्टडी
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मोबाइल टॉवर
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विस्तार
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अगर आप अपने पड़ोसी की छत पर लगे मोबाइल टावर से चिंतित हैं तो अब चिंता की कतई जरूरत नहीं है। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि इन मोबाइल टावरों से निकलने वाले ईएमएस रेडिएशन से जान का कोई खतरा नहीं है। संचार एवं आईटी मंत्रालय में दूरसंचार विभाग के सचिव जेएस दीपक ने यह जानकारी दी।
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बृहस्पतिवार को राजपुर रोड स्थित होटल में मोबाइल तरंगों को लेकर पैदा भ्रम दूर करने के लिए टेलीकॉम विभाग की ओर से जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका शुभारंभ मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने किया।

कार्यशाला में सचिव जेएस दीपक ने बताया कि देश दुनिया में 25 हजार से ज्यादा शोध हो चुके हैं, जिनसे यह साफ हो चुका है कि मोबाइल टावरों से निकलने वाली ईएमएफ रेडिएशन स्वास्थ्य पर कोई बुरा असर नहीं डालती है।
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उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से अनुशंसित इंटरनेशनल कमीशन ऑन नॉन आयोनाइजिंग रेडिएशन प्रोटेक्शन के मानकों के मुकाबले दस गुना सख्त है।

16 हाईकोर्ट कर चुके हैं याचिकाओं को खारिज

मोबाइल टॉवर पर अवेयरनेस प्रोग्राम में बोलते शिवेंद्र भटनागर - फोटो : अमरउजाला
देश के 16 हाईकोर्ट मोबाइल टावरों से होने वाले नुकसान को लेकर दायर की गई जनहित याचिकाओं को खारिज कर चुके हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तो इसके लिए बाकायदा पांच आईआईटी, एम्स दिल्ली, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च के विशेषज्ञों की समिति बनाई थी।

समिति ने जांच में पाया कि ऐसा कोई प्रमाण नहीं हैं जो मोबाइल बीटीएस टावर से निकलने वाली ईएमएफ रेडिएशन के खतरे की पुष्टि करते हों। कार्यशाला में टेलीकॉम इंफोर्समेंट रिसोर्स एंड मॉनिटरिंग यूनिट के सीनियर डीडीजी शिवेंद्र भटनागर ने बताया कि अगर भी कंपनी ईएमएफ नियमों का उल्लंघन करते हुए पाई जाती है तो उस पर दस लाख रुपये का कड़ा जुर्माना लगाने का प्रावधान है।

उन्होंने बताया कि ग्रेस कैंसर फाउंडेशन के डॉ. सुरेश अत्तीली और दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के डॉ. टीके जोशी का भी कहना है कि रेडिएशन से नुकसान का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
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आज घंटाघर पर दिखाएंगे रेडिएशन की जांच का डेमो

मोबाइल फोन - फोटो : demo pics
संचार एवं आईटी मंत्रालय में दूरसंचार विभाग के सचिव जेजे दीपक ने बताया कि मोबाइल टावर से निकलने वाले रेडिएशन की जांच का डेमो शुक्रवार को घंटाघर के पास स्थित टावर की जांच से किया जाएगा। इसमें बताया जाएगा कि एक टावर का रेडिएशन कितना होता है और इससे स्वास्थ्य को कोई खतरा नहीं है।

क्या होता है ईएमएफ रेडिएशन
यह विद्युम चुंबकीय उत्सर्जन होता है। या यूं कहें कि एक ऐसी ऊर्जा जो कि एक जगह से दूसरी जगह ट्रेवल करती है। यह नेचर के हिसाब से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक होती है। यह इलेक्ट्रिक वेव्स और मैग्नेटिक एनर्जी का संयुक्त रूप होता है, जो कि प्रकाश की चाल की गति से चलती हैं।

यह रेडिएशन अगर दो वाट प्रति किलो होगा तो निश्चित तौर पर नुकसानदायक हो सकता है लेकिन नियमों के हिसाब से यह एक वाट प्रति वर्ग मीटर होता है। यानी अगर एक 80 किलो का व्यक्ति है तो उसके लिए कम से कम 160 किलोवाट रेडिएशन खतरनाक जरूर होगा लेकिन नियमों के हिसाब से इतने वजन वाले व्यक्ति को वर्ग मीटर के हिसाब से एक किलोवाट तक भी पूरा नहीं मिलता है। लिहाजा, इससे कोई नुकसान नहीं है।
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