बारिश के साथ ही उत्तराखंड में गहरा रहे इस बिजली संकट की वजह नदियों के अंदर ही मौजूद है। राज्य की नदियों में गाद (सिल्ट) आने से जल विद्युत परियोजनाओं की टरबाइनों की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
कुछ परियोजनाओं में तो घंटों विद्युत उत्पादन पूरी तरह से ठप रहा। परिणाम स्वरूप प्रदेश बिजली संकट गहराने लगा है। भीषण गर्मी और उमस में गढ़वाल और कुमाऊं दोनों मंडलों में घंटों बिजली कटौती होने के कारण लोग परेशान हो रहे हैं।
बृहस्पतिवार को जल विद्युत निगम के 90 मेगावाट क्षमता की मनेरी भाली-प्रथम (तिलोथ) जल विद्युत परियोजना में अत्यधिक मात्रा में सिल्ट और कूड़ा-करकट आने से टरबाइनों को बचाने के लिए सुबह करीब दस बजे उत्पादन रोकना पड़ा। परियोजना से शाम लगभग पांच बजे विद्युत उत्पादन मिलना शुरू हुआ। इसी तरह 300 मेगावाट की मनेरी भाली-दो (धरासू) परियोजना से सुबह पौने दस बजे से दोपहर करीब 12 बजे तक बिजली नहीं मिल पाई।
उधर, यमुना वैली की 30 मेगावाट की कुल्हाल जल विद्युत परियोजना में शाम तीन बजे से चार बजे तक विद्युत उत्पादन ठप रहा। इसके अलावा अन्य जल विद्युत परियोजनाओं में भी कुछ समय के लिए बीच-बीच में उत्पादन नहीं हो पाया। पावर कारपोरेशन का कहना है कि जल विद्युत गृहों में उत्पादन कम होने के कारण ही प्रदेश में विभिन्न जगह बिजली कटौती करनी पड़ी।
गढ़वाल और कुमाऊं दोनों मंडलों में कटौती
बिजली संकट
गढ़वाल और कुमाऊं मंडल की फर्नेस इंडस्ट्री में सुबह 10 बजे से दोपहर करीब 12 बजे तक बिजली कटौती हुई। नान कंटीनियस इंडस्ट्री कुमाऊं में सुबह 10.26 बजे से करीब दो घंटे, नान कंटीनियस इंडस्ट्री पंतनगर में सुबह 10.20 से डेढ़ घंटे, नान कंटीनियस इंडस्ट्री सिडकुल, हरिद्वार व ज्वालापुर में सुबह 10.30 बजे से डेढ़ घंटे, नान कंटीनियस इंडस्ट्री गढ़वाल में सुबह 10.45 बजे से सवा घंटे तक विद्युत कटौती की गई। इसके अलावा लक्सर, मंगलौर, भगवानपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में भी कुछ समय के लिए विद्युत कटौती की गई।
73 लाख 20 हजार यूनिट बिजली खरीदी
कारपोरेशन के डायरेक्टर (एचआर) एवं प्रवक्ता पीसी ध्यानी ने बताया कि प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी के कारण जल विद्युत परियोजनाओं में विद्युत उत्पादन की अनिश्चितता बनी हुई है। इसे देखते हुए इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से आज (शुक्रवार) के लिए 73 लाख 20 हजार यूनिट अतिरिक्त बिजली की खरीद कर ली गई है।