उत्तराखंड में कुछ माह पूर्व ही आईटीआई में लागू की गई मोबाइल मॉनीटरिंग का असर दिखने लगा है। योजना लागू होने के बाद आईटीआई में शिक्षकों और बच्चों की उपस्थिति नजर आने लगी है।
क्लास में न आने पर परिजनों तक एसएमएस पहुंचने के डर से बच्चे क्लास में पहुंचने लगे हैं। वहीं, शिक्षकों को भी बिना बताए ड्यूटी से गायब रहने पर नौकरी जाने का डर सताने लगा है।
योजना के बेहतर नतीजे
दूरदराज की आईटीआई खुली या नहीं, कितने शिक्षक और बच्चे उपस्थित हैं, ये जानकारी प्रतिदिन शासन को बैठे-बैठे मिल रही है। इस योजना के बेहतर नतीजे आने के बाद सरकार इसे सभी पॉलीटेक्निक और इंजीनियरिंग कालेजों में लागू करने जा रही है।
प्रदेश में तकनीकी शिक्षा का माहौल बेहतर बनाने के लिए सरकार ने कुछ महीने पहले मोबाइल सिस्टम से मॉनीटरिंग शुरू की थी। पूरी तरह से मोबाइल आधारित इस सिस्टम के शुरू होने से आईटीआई में लेटलतीफी और न आने वाले शिक्षकों और बच्चों की संख्या घटी है।
क्या है योजना
इस सिस्टम के माध्यम से घर बैठे अभिभावकों को उनके मोबाइल पर एसएमएस से बच्चे के न आने की जानकारी भेजी जा रही है। वहीं, शिक्षकों की जानकारी सीधे शासन को मिल रही है। इसके माध्यम से अन्य जरूरी सूचनाओं का आदान-प्रदान भी किया जा रहा है।
बताया गया है कि सरकार ने इसके लिए एक मोबाइल कंपनी से करार किया था। अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने बताया कि अक्सर आईटीआई न खुलने, शिक्षकों के न पहुंचे और बच्चों की गैरहाजिरी की शिकायतें आती थीं। इसी को देखते हुए प्रदेश की सभी 70 आईटीआई को इससे जोड़ा गया है।
इसके नतीजे बेहतर आए हैं, सुबह और दोपहर को होने वाली अटेंडेंस की सूचना शासन तक पहुंच रही है। जल्द सभी पॉलीटेक्निक और इंजीनियरिंग कालेजों को भी इस सिस्टम से जोड़ा जाएगा।