उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी के साथ थ्री जी सेवाओं को फास्ट करने के लिए अब हाईटेंशन लाइन वाले विद्युत टावरों का सहारा लिया जाएगा।
इन टॉवरों पर मोबाइल सिग्नल ट्रांसमिशन के उपकरण लगाकर पर्वतीय इलाकों में मोबाइल नेटवर्क सुधारा जाएगा। वहीं इसके एवज में मोबाइल कंपनियों से किराए के रूप में ऊर्जा निगम को बड़ी रकम भी मिलेगी। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के इस प्रस्ताव पर मुख्य सचिव शत्रुघन सिंह की अध्यक्षता वाली एपेक्स कमेटी ने इसकी स्वीकृति दे दी है।
अब आईटी विभाग योजना के क्रियान्वयन के लिए ऊर्जा विभाग से मिलकर प्रारूप तय करेगा। प्रदेश के पर्वतीय इलाकों में मोबाइल टावर नहीं होने से वहां कनेक्टिविटी की गंभीर समस्या है। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने अब एक प्रस्ताव तैयार किया है जिसमें कई मीटर ऊंचे हाईटेंशन विद्युत टावरों का उपयोग मोबाइल टावर के बदले किया जा सकेगा।
सचिव आईटी दीपक कुमार ने बताया कि प्रदेश की भोगौलिक स्थिति ऐसी है कि अधिकांश जगहों में मोबाइल टावर नहीं है जिससे कनेक्टिविटी नहीं बन पाती।
ऊर्जा विभाग के हाईटेंशन लाइनों के टावर कई सौ फीट ऊंचे होते हैं, जिसकी एक ऊंचाई तक मोबाइल कनेक्टिविटी उपकरण लगाए जाने से तकनीकी रूप से कोई दिक्कत नहीं आएगी। एपेक्स कमेटी की सहमति मिलने के बाद अब विद्युत विभाग से इसकी औपचारिकताओं को लेकर कार्ययोजना बनाई जाएगी।
सीमांत एरिया में आईटीबीपी लगाएगी मोबाइल टावर
चीन से सटी भारतीय सीमांत क्षेत्रों में मोबाइल टावरों की अनुमति नहीं मिलने से प्रदेश के पांच सीमांत जनपदों में मोबाइल फोन कनेक्टिविटी खासी समस्या है। प्रदेश सरकार कई बार इस मसले को केंद्र के समक्ष उठा चुकी है। सीमांत जनपदों के विधायक भी सदन में इसको लेकर हंगामा कर चुके हैं।
अब केंद्र ने सीमांत क्षेत्रों में मोबाइल फोन के लिए आईटीबीपी (भारत तिब्बत सीमा पुलिस) को टावर लगाने की अनुमति दी है। उत्तराखंड में 39 जगह टावर लगाने की आईटीपीबी को अनुमति मिली है।