देहरादून के रायपुर में प्रस्तावित एमएलए हॉस्टल सहित अधिकारियों के आवासों को रिजर्व फॉरेस्ट में क्लीयरेंस देने के मामले में नया पेंच फंस गया है। दून पहुंचे एडीजी डॉ. एसएस नेगी ने जब शुक्रवार की शाम मौके का मुआयना किया तो राज्य के अधिकारियों से पूछा कि इस जगह को चुनने की वजह क्या है?
इसके जवाब में ही क्लीयरेंस की अनुमति छिपी है। हालांकि, राज्य के अफसर आशान्वित हैं कि टीम राज्य की मजबूरी समझते हुए रिपोर्ट देगी और अगली बैठक में निर्णय हो जाएगा।
डॉ. नेगी ने बताया कि वन अधिनियम 1980 में यह प्रावधान है कि रिजर्व फॉरेस्ट में दफ्तर बनाने तक की अनुमति तो दी जा सकती है, लेकिन आवास की नहीं। लिहाजा राज्य अगर यह बताए कि उन्होंने इन आवासों के लिए रिजर्व फॉरेस्ट की यह जगह क्यों चुनी है। अगर मंत्रालय इस जवाब से संतुष्ट हुआ तो अनुमति मिल सकती है। इस मौके पर अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा, डीएम, एसडीएम, डीएफओ मसूरी सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।