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दून: रायपुर में विधायक हॉस्टल पर फंसा नया पेंच

Sat, 30 May 2015 10:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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देहरादून के रायपुर में प्रस्तावित एमएलए हॉस्टल सहित अधिकारियों के आवासों को रिजर्व फॉरेस्ट में क्लीयरेंस देने के मामले में नया पेंच फंस गया है। दून पहुंचे एडीजी डॉ. एसएस नेगी ने जब शुक्रवार की शाम मौके का मुआयना किया तो राज्य के अधिकारियों से पूछा कि इस जगह को चुनने की वजह क्या है?
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इसके जवाब में ही क्लीयरेंस की अनुमति छिपी है। हालांकि, राज्य के अफसर आशान्वित हैं कि टीम राज्य की मजबूरी समझते हुए रिपोर्ट देगी और अगली बैठक में निर्णय हो जाएगा।

डॉ. नेगी ने बताया कि वन अधिनियम 1980 में यह प्रावधान है कि रिजर्व फॉरेस्ट में दफ्तर बनाने तक की अनुमति तो दी जा सकती है, लेकिन आवास की नहीं। लिहाजा राज्य अगर यह बताए कि उन्होंने इन आवासों के लिए रिजर्व फॉरेस्ट की यह जगह क्यों चुनी है। अगर मंत्रालय इस जवाब से संतुष्ट हुआ तो अनुमति मिल सकती है। इस मौके पर अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा, डीएम, एसडीएम, डीएफओ मसूरी सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
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केंद्रीय टीम ने किया हास्टल का दौरा

उधर, रायपुर में प्रस्तावित विधानसभा व सचिवालय को एनओसी देने के बाद अब केंद्रीय टीम ने आवासीय परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान राज्य के अफसर भी मौजूद रहे। एक बार फिर प्रस्तावित भूमि का निरीक्षण किया गया।

विधानसभा व सचिवालय भवन के साथ ही मंत्री, विधायक व अधिकारी कर्मचारी आवास के लिए आवासीय परिसर पर टीम अपनी रिपोर्ट केंद्र को सौंपेगी। इसके बाद अगली बैठक में इस रिपोर्ट पर निर्णय होगा।

इनका है कहना
केंद्रीय टीम को दौरा करा दिया है। आसपास एक दो विकल्प थे लेकिन वहां पर्याप्त जमीन नहीं थी और गांव वाले जमीन देने के लिए तैयार नहीं है। टीम को मजबूरी बताई गई है। आवासीय परिसर बनने से बहुत ज्यादा क्षेत्रफल प्रभावित भी नहीं होना है। उम्मीद है कि केंद्र की अगली बैठक में फैसला हो जाएगा। केंद्रीय टीम ने भी हमारी बात को समझने की पूरी कोशिश की है।
-राकेश शर्मा, अपर मुख्य सचिव
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