गंगा में खनन के खिलाफ मातृसदन के आंदोलन का फिर केंद्र के गंगा मंत्रालय ने संज्ञान लिया है। मंत्रालय ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा पर्यावरण मंत्रालय को पत्र भेजकर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धारा-5 सख्ती से लागू कराने के आदेश दिए हैं।
साथ ही गंगा में खनन कर अधिनियम का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ फौजदारी की कार्रवाई कर रिपोर्ट भी तलब की है। गंगा मंत्रालय इस आदेश के साथ ही स्वामी शिवानंद ने 13वें दिन अपने आंदोलन को पूर्णाहुति दे दी।
सरकार ने 13 मई को गंगा में श्यामपुर और चिड़ियापुर में वन विकास निगम का खनन खोल दिया था। इसके अगले ही दिन 14 मई को मातृसदन का आंदोलन शुरू हो गया था। ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद के अनशन के बीच ही गंगा में बिशनपुर और भोगपुर में भी खनन खोल दिया गया, जबकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धारा-5 लागू की गई थी।
तीन मई को एक जनहित याचिका पर हाईकोर्ट नैनीताल ने भी धारा-5 लागू कराते हुए गंगा के पांच किमी के दायरे में खनन बंद कराने के आदेश दिए थे। मातृसदन ने हाईकोर्ट की अवमानना का केस भी दायर किया है।
खनन चलने के साथ ही मुख्य सचिव एस रामास्वामी, औद्योगिक विकास सचिव शैलेश बगोली, डीएम दीपक रावत, डीएफओ एचके सिंह और वन विकास निगम के डीएलएम आईपीएस रावत पर कार्रवाई की मांग को लेकर मातृसदन का आंदोलन चलता रहा। ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद के 11 दिन अनशन के बाद से स्वामी शिवानंद का अनशन जारी रहा। इस दरम्यान स्वामी शिवानंद ने छह दिन तक जल का भी त्याग किया और तीन दिन मौन धारण किया।