फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रंग लाया स्वामी शिवानंद का तप, गंगा मंत्रालय ने PCB को पत्र भेजकर रिपोर्ट की तलब

Tue, 06 Jun 2017 01:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
विज्ञापन
विज्ञापन
गंगा में खनन के खिलाफ मातृसदन के आंदोलन का फिर केंद्र के गंगा मंत्रालय ने संज्ञान लिया है। मंत्रालय ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा पर्यावरण मंत्रालय को पत्र भेजकर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धारा-5 सख्ती से लागू कराने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन


साथ ही गंगा में खनन कर अधिनियम का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ फौजदारी की कार्रवाई कर रिपोर्ट भी तलब की है। गंगा मंत्रालय इस आदेश के साथ ही स्वामी शिवानंद ने 13वें दिन अपने आंदोलन को पूर्णाहुति दे दी।       

सरकार ने 13 मई को गंगा में श्यामपुर और चिड़ियापुर में वन विकास निगम का खनन खोल दिया था। इसके अगले ही दिन 14 मई को मातृसदन का आंदोलन शुरू हो गया था। ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद के अनशन के बीच ही गंगा में बिशनपुर और भोगपुर में भी खनन खोल दिया गया, जबकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धारा-5 लागू की गई थी।
विज्ञापन



तीन मई को एक जनहित याचिका पर हाईकोर्ट नैनीताल ने भी धारा-5 लागू कराते हुए गंगा के पांच किमी के दायरे में खनन बंद कराने के आदेश दिए थे। मातृसदन ने हाईकोर्ट की अवमानना का केस भी दायर किया है।

खनन चलने के साथ ही मुख्य सचिव एस रामास्वामी, औद्योगिक विकास सचिव शैलेश बगोली, डीएम दीपक रावत, डीएफओ एचके सिंह और वन विकास निगम के डीएलएम आईपीएस रावत पर कार्रवाई की मांग को लेकर मातृसदन का आंदोलन चलता रहा। ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद के 11 दिन अनशन के बाद से स्वामी शिवानंद का अनशन जारी रहा। इस दरम्यान स्वामी शिवानंद ने छह दिन तक जल का भी त्याग किया और तीन दिन मौन धारण किया। 
Trending Videos
विज्ञापन

कार्रवाई हुई तो जद में आएंगे कई अधिकारी      

बहरहाल अब केंद्रीय गंगा मंत्रालय ने मातृसदन के आंदोलन का संज्ञान लेते हुए सीपीसीबी और वन तथा पर्यावरण मंत्रालय को पत्र लिखा है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धारा-5 लागू कराते हुए खनन पर रोक लगाने और पूर्व में जारी आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ फौजदारी की कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए।

​इस आदेश की प्रतिलिपि मिलने के बाद शाम छह बजे स्वामी शिवानंद ने जूस पीकर अनशन को पूर्णाहुति दी। इस मौके पर अरुण भदौरिया, गुलशन खत्री सहित कई गंगा भक्त मातृसदन पहुंचे। उन्होंने कहा कि एक बार फिर सत्य की जीत हुई है।   
    
गंगा मंत्रालय ने पत्र में काफी सख्त भाषा का इस्तेमाल किया है। पत्र के आधार पर कार्रवाई होने पर कई अधिकारी इसकी जद में आएंगे। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धारा-5 पिछले साल दिसंबर में लागू की गई थी, जिसके तहत गंगा में खनन पूरी तरह प्रतिबंधित करते हुए पांच किमी के दायरे में क्रशिंग पर भी रोक लगाई गई है।

इसके पालने के लिए सीधे तौर पर मुख्य सचिव और डीएम व एसएसपी की जवाबदेही तय की गई है। आदेश का उल्लंघन होने पर अधिकारियों पर जुर्माने और सजा का प्रावधान भी है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें