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दून में माफियाराज कायम

Thu, 08 Aug 2013 10:46 AM IST
देहरादून/ब्यूरो
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राजधानी की नदियों को खोद रहे खनन माफिया के लिए अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) का आदेश भी फेल नजर आ रहा है। रोक के बावजूद दर्जनों ट्रक और ट्रैक्टर ट्रालियां नदियों में उतर गईं।
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अमर उजाला टीम ने बुधवार को मोथरोवाला से बुल्लावाला तक सुसवा नदी का जायजा लिया तो सुबह चार बजे ही यहां कई डंपर रेत, बजरी, पत्थर निकालते नजर आए। साढ़े आठ बजे नागल ज्वालापुर के पास नदी में तीन ट्रैक्टर ट्रालियां नजर आईं। नौका के पास तो जेसीबी लगी थी, जबकि यह क्षेत्र राजाजी राष्ट्रीय पार्क में आता है। सभी जगह नदियों से खनन कर पत्थर और रेत के ढेर सड़क किनारे लगाए जा रहे थे।

कैसे घुसते हैं ट्रैक्टर
संबंधित क्षेत्र राजाजी राष्ट्रीय पार्क की सीमा में आता है। पार्क में किसी का खाली हाथ घुसना भी वर्जित है। पार्क क्षेत्र में प्रवेश के लिए पहले विभाग से अनुमति लेना जरूरी होता है। इसके बावजूद हर रोज पार्क क्षेत्र में वन विभाग की ही सड़क से सैकड़ों वाहन कैसे निकल जाते हैं, यह बड़ा सवाल है।
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कहां चलाया अभियान
कुछ दिन पूर्व वन विभाग ने सुसवा नदी पर खनन करने वालों पर नकेल कसने के नाम पर छापामार अभियान चलाया। हैरत की बात यह रही कि मोथरोवाला से बुल्लावाला तक दर्जनों कर्मचारियों को नदी में उतारने के बावजूद वन विभाग को कहीं कोई खनन करता नजर नहीं आया।

पुलिस, वन विभाग तैनात
राजाजी राष्ट्रीय पार्क के जिस क्षेत्र में अवैध खनन हो रहा है, वहां से मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर रामगढ़ रेंज की फांदोवाला चौकी और रेंज कार्यालय है। इसके अलावा सात किलोमीटर दूरी पर बुल्लावाला चौकी, पांच किलोमीटर पर डोईवाला थाना, तीन किलोमीटर पर लच्छीवाला रेंज की नागल ज्वालापुर चौकी, इसके पास ही दूधली चौकी और दूसरी ओर चार किलोमीटर पर क्लेमेंटटाउन थाना है। यानी खनन क्षेत्र के चप्पे-चप्पे पर पुलिस, वन विभाग की निगहबानी रहती है। इसके बावजूद धड़ल्ले से खनन जारी है।

डरते हैं ग्रामीण
वन विभाग और पुलिस को अवैध खनन की शिकायत करने से ग्रामीण डरते हैं। स्थानीय ग्रामीण त्रिलोक सिंह बताते हैं कि कई बार ऐसा हुआ कि वन विभाग को शिकायत की गई और खनन माफिया संबंधित ग्रामीण से लड़ने आ पहुंचे। सिंह कहते हैं विभाग के ही कुछ कर्मचारी खनन माफिया को शिकायत करने वाले की जानकारी देते हैं।

ऐसे बाजार पहुंचते हैं डंपर और ट्राली
खनन माफिया पार्क क्षेत्र से निकाले जाने वाले पत्थर और रेत के ढेर सड़क किनारे लगा देते हैं। यहां से डंपरों से इन्हें दून शहर और डोईवाला पहुंचाया जाता है। मोथरोवाला से डोईवाला तक सड़क पर जगह-जगह रेत, बजरी के ढेर देखे जा सकते हैं।

खनन माफिया पूरी ‘फील्डिंग’ की है। जगह-जगह उनके लोग खड़े रहते हैं। छापे के लिए पुलिस थाने से वाहन निकलते ही उन तक पूरी सूचना पहुंच जाती है और वे भाग निकलते हैं। हैरानी की बात यह है कि खनन की शिकायतें तो आती हैं, लेकिन आज तक कभी राजस्व (खनन) और वन विभाग ने पुलिस को इस पर रोकथाम के लिए लिखित में कुछ नहीं दिया है।
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-कमलेश नंबूरी, कोतवाली निरीक्षक डोईवाला

पार्क प्रशासन की ओर से खनन माफिया के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। कहीं भी कोई खनन करता मिला तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।
-एचएस सिंह, उप निदेशक राजाजी राष्ट्रीय पार्क

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