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तीज पर भी आपदा की मार

Thu, 08 Aug 2013 10:19 AM IST
देहरादून/ब्यूरो
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हरियाली तीज की तैयारियों में इन दिनों शहर की महिलाएं जुटी हैं। बाजार में भी इसके लिए खास तैयारी है। नई साड़ियों के साथ ही मेहंदी के कूपन भी निकाले गए हैं। हालांकि इस बार बाजार में छाई मंदी भी साफ नजर आ रही है। नौ अगस्त को है हरियाली तीज का पर्व।
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तीन बुराइयां छोड़ने का पर्व
तीज को तीन बुराइयों को त्यागने का पर्व माना जाता है। ये हैं छल-कपट, झूठ और परनिंदा। इस पर्व को लेकर मान्यता है कि पार्वती जी ने अपने पति भोले-शंकर के लिए यह व्रत किया था। यह भी माना जाता है कि जब सती को उनके पिता ने घर नहीं बुलाया तो उन्होंने एक ऐसे पर्व की शुरूआत की, जिसमें बेटियों को मायके वाले बुलाएं और तब से ही यह पर्व मनाया जाता है। श्रावण शुक्ल तृतीया को ही कजली तीज का लोक पर्व मनाया जाता है। इस मौके पर बेटियों को मायके बुलाया जाता है। मायके वाले बेटियों के ससुराल सिंधारा (साड़ी, बिंदी, मिठाई आदि) भी भिजवाते हैं।

बाजार में मंदी
आपदा को लेकर बाजार में छाई मंदी तीज के पर्व पर साफ दिखाई दे रही है। स्थानीय महिलाएं भले ही तीज की तैयारियों में जुटी हैं और बाजार में भी नए आइटम आएं हैं, फिर भी बाजार सूना है। आपदा के चलते बाजार में बाहरी पर्यटक भी नहीं हैं। ऐसे में मेहंदी वालों के पास भी भीड़ नजर नहीं आ रही है। वहीं कई लोग ऐसे भी हैं जो पर्व के मौके पर गढ़वाल में अपने परिवार की महिलाओं के लिए साड़ी आदि सामान खरीदकर ले जाते हैं, वो भी इस बार खरीदारी करने नहीं निकले।
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मेहंदी के लिए विशेष कूपन निकाले हैं। त्योहार है तो महिलाएं मेहंदी लगवाने तो आएंगी, लेकिन हर साल जैसा क्रेज इस बार नहीं है। बाहरी पर्यटकों से भी पहले बाजार गुलजार रहता था, वे भी मेहंदी लगवाते थे। इस बार ऐसा कुछ नहीं है। आपदा के चलते बाजार सूना है।
-मनोज (मनोज मेहंदी आर्ट)

तीज पर्व के लिए जयपुरी, लहरिया और प्रिंटेड साड़ियां लाए हैं, लेकिन खरीदार कम हैं। इसकी वजह साफ है कि इस पर्व के मौके पर गढ़वाल में रहने वाले लोग घर छुट्टी पर जाते थे तो साड़ी आदि सामान खरीदकर ले जाते थे। लेकिन इस बार एक भी ऐसा ग्राहक नहीं आया है। साड़ियों की बिक्री काफी धीमी है।
-मीनू जैन (जैन टैक्सटाइल साड़ी शॉप)

आसमान में घुमड़ती काली घटाओं के कारण इस पर्व को कजली तीज अथवा हरियाली के कारण हरियाली तीज कहा जाता है। प्रकृति एवं मानव हृदय की भव्य भावना की अभिव्यक्ति तीज पर्व में निहित है।
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-आचार्य भरत राम तिवारी, उपाध्यक्ष उत्तराखंड विद्वत सभा

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