घटती कृषि जोत भी पलायन का बड़ा कारण
जिले में घटती कृषि जोत भी पलायन का एक बड़ा कारण बनकर सामने आई है। जिले के 70 प्रतिशत अधिक किसानों के पास दो से पांच बीघा भूमि है। ऐसे किसान आजीविका के अन्य स्रोतों की तलाश में कस्बों या जिले से बाहर पलायन कर रहे हैं। कई ब्लाकों में जंगली जानवरों से भी कृषि को नुकसान हो रहा है। नील गाय के प्रकोप से फसल नष्ट हो रही है। रिपोर्ट में वन विभाग के साथ मिलकर इसका उपाय ढूंढने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
हरिद्वार जिले की स्थिति
हरिद्वार जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल 2360 वर्ग किमी है, जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 4.4 प्रतिशत है। जनपद की जनसंख्या राज्य की कुल जनसंख्या का 18.70 प्रतिशत है।
जिले में अस्थायी पलायन की स्थिति
| ब्लाक |
ग्राम पंचायत |
लोगों की संख्या |
| बहादराबाद |
46 |
3091 |
| रुड़की |
40 |
2376 |
| भगवानपुर |
32 |
1716 |
| खानपुर |
17 |
300 |
| लक्सर |
10 |
574 |
| नारसन |
8 |
111 |
| कुल |
153 |
8168 |
हरिद्वार जिले में पलायन पर आधारित रिपोर्ट बीते छह माह में तैयार की गई है। इसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंप दिया गया है। रिपोर्ट में हरिद्वार जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक, आर्थिक विकास को सुदृढ़ करने एवं पलायन को कम करने उपाय भी सुझाए गए हैं। - डॉ. एसएस नेगी, उपाध्यक्ष, ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग।
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अब 12 जिलों की रिपोर्ट सौंप चुका आयोग
ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग हरिद्वार को मिलाकर अब तक 12 जिलों की रिपोर्ट सरकार को सौंप चुका है। अब एक मात्र ऊधमसिंह नगर जिला बचा है जिसकी रिपोर्ट सरकार को सौंपी जानी है। ऊधमसिंह नगर जिले में इन दिनों सर्वे का काम जारी है। आयोग के उपाध्यक्ष एसएस नेगी की मानें तो अगले छह माह में ऊधमसिंह नगर जिले की रिपोर्ट भी सरकार को सौंप दी जाएगी।