चार दिन पूर्व प्रदेशभर के 500 से अधिक स्कूलों में किए गए औचक निरीक्षण में स्कूल बंद मिलने के मामले में विभाग ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है।
स्कूलों के हेडमास्टरों को निलंबित किया
बंद स्कूलों के सभी शिक्षकों, प्रिंसिपलों, संबंधित ब्लाक के बीईओ, बीआरसी और सीआरसी को सस्पेंड कर दिया गया है। इनके अलावा नदारद मिले शिक्षकों और एमडीएम न बनाने वाले स्कूलों के हेडमास्टरों को भी निलंबित किया गया है।
शिक्षा विभाग में लापरवाही पर पहली बार इस तरह की बड़ी कार्रवाई की गई है। शिक्षा महानिदेशक राधिका झा के निर्देश पर 24 मई को प्रदेश के 500 से अधिक स्कूलों का निरीक्षण किया गया था।
इस दौरान टिहरी जिले में तीन प्राथमिक विद्यालय दिखोलगांव, पटूड़ी और ओखला जबकि उत्तरकाशी में राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल सिरोड़ भटवाड़ी में ताले लटके मिले थे।
पूरे प्रदेश में 26 शिक्षक बिना पूर्व सूचना के नदारद थे, जबकि 13 स्कूलों में बच्चों के लिए मिड डे मील नहीं बनाया जा रहा था।
शिक्षा निदेशक राधिका झा ने बुधवार को संबंधित शिक्षकों, बीईओ, बीआरसी, सीआरसी का निलंबन आदेश जारी कर दिया।
आदेश में कहा कि जांच आख्या को ही प्रारंभिक जांच मानते हुए निलंबन के साथ ही आरोप पत्र जारी किए जाएं। निलंबित शिक्षकों-अफसरों की संख्या 50 से अधिक बताई जा रही है।
महानिदेशक ने इसके अलावा संबंधित जिला शिक्षाधिकारियों और मुख्य शिक्षा अधिकारियों से भी जवाब तलब किया है।
एमडीएम में ये नपे
रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी के प्राथमिक विद्यालय नौताला, बैरांगना, पित्रधार, गहरखाल, कन्या जूनियर हाईस्कूल कांडेई, मयाली, उडनहेड़ी नारसन, बछुवाबांण गैरसैंण, नैलकुडाऊ, बनोली, त्रिकोट और मलारी के हेडमास्टर।
नहीं मिल रहा राशन
सुप्रीम कोर्ट के आदेश और शिक्षा विभाग अधिकारियों के लाख दावों के बावजूद स्कूलों में बच्चों के लिए मिड डे मील नहीं बन पा रहा है। विभाग के अधिकारियों ने स्कूलों का औचक निरीक्षण किया तो वे ये देख खुद हैरान रह गए।
हाल ही में रायपुर ब्लॉक में इस तरह का मामला सामने आया था। स्कूल के बच्चों को दो दिन भूखे पेट स्कूल से घर लौटना पड़ा।
जबकि जीजीआईसी बुल्लावाला में शिक्षक बच्चों का चावल खा गए थे। उधर, शिक्षकों का कहना है कि स्कूलों के लिए राशन की दुकान से राशन ही नहीं मिल पा रहा है। यह समस्या पिछले दो महीने से बनी हुई है।