केदारनाथ पुनर्निर्माण आपरेशन के तहत धाम में 16 दिनों के अभियान में 125 टन भारी मशीनें पहुंचाने के बाद यह हेलीकॉप्टर चंडीगढ़ रवाना हो गया। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गौचर हवाई पट्टी पहुंचकर भारतीय वायु सेना के एमआई-26 की टीम को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री मंगलवार दोपहर 1.10 बजे गौचर हवाई पट्टी पर पहुंचे। उन्होंने एमआई-26 के विंग कमांडर जीएस तुंग, विंग कमांडर एएस बाजवा, विंग कमांडर विनय कुमार सहित 26 सदस्यीय दल को प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
सीएम ने कहा कि वायु सेना ने सरकार से लेकर आम जन के मन में जो हौसला भरा है, वह आने वाले सुनहरे कल को भी बता गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वायु सेना के जांबाजों ने एमआई-26 से धाम में भारी मशीनें पहुंचाकर यह संदेश तो दे दिया है कि यहां अब सब सामान्य है।
बदरीनाथ और कैलास यात्रा में ले सकते हैं मदद
मुख्यमंत्री ने कहा कि एमआई-26 की टीम ने उम्मीदों को पंख लगाए हैं। सरकार बदरीनाथ और कैलास मानसरोवर यात्रा में जरूरी व्यवस्थाओं के लिए भी एमआई-26 की मदद ले सकती है।
रावत ने निम के साथ-साथ जिला प्रशासन की भी सराहना की। मुख्यमंत्री ने एमआई-26 हेलीकाप्टर के बारे में जानकारी ली और कुछ देर उसमें बैठे भी।
केदारनाथ राष्ट्रीय प्रतिष्ठा का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने कहा कि केदारनाथ राष्ट्रीय प्रतिष्ठा का प्रतीक है। कहा कि हम यह नहीं चाहते थे कि दुनिया कहे कि उत्तराखंड अपनी प्राचीन धरोहरों की देखरेख और सुरक्षा नहीं करता है। केदारनाथ पुनर्निर्माण का उद्देश्य यात्रियों को अधिकाधिक संख्या में धाम में पहुंचाना है।
कमियों के लिए स्वयं जिम्मेदार रहूंगा
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि किसी भी कार्य में अच्छाइयों के साथ कुछ कमियां भी रहती है, जो विकास का हिस्सा है। केदारनाथ पुनर्निर्माण सहित प्रदेश के विकास की अच्छाइयां आपके हिस्से और जिस भी क्षेत्र में थोड़ी सी भी खामी रहे, तो उसके लिए वह स्वयं जिम्मेदार रहेंगे।
आखिरी चक्कर में पहुंचाई चेसिस और चेन
वायु सेना के एमआई-26 ने गौचर हवाई पट्टी से केदारनाथ के लिए अपने अंतिम चक्कर में पोकलैंड की चेसिस और चेन पहुंचाई। केदारनाथ में मौसम सुबह से सुहावना बना रहा और चटख धूप खिली रही।
मंगलवार को धाम में अधिकतम तापमान 10.8 और न्यूनतम माइनस 7.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। निम के रंजीत सिंह नेगी ने बताया कि आपदा से प्रभावित भवनों के ध्वस्तीकरण कार्य के तहत 20 सरकारी भवन पूर्ण रूप से तोड़ दिए गए हैं। इधर गुप्तकाशी से हेलीकाप्टर से 11 सौ लीटर डीजल भी पहुंचाया गया।