मनरेगा के तहत ब्लॉक में सबसे ज्यादा सिंचाई गूलों, सुरक्षा दीवारों का निर्माण हुआ है। इसके अलावा रेशम, उद्यान विभाग के तहत पौधे रोपे जाने के काम के एवज में भी लोगों को भुगतान किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा से ज्यादा लोगों को जोड़ने के लिए व्यक्तिगत काम जैसे शौचालय, पशुबाड़े का निर्माण योजना के लाभार्थी पात्रों से ही करवाकर उन्हें दोगुना लाभ दिया गया। लॉकडाउन के समय में ज्यादा से ज्यादा लोग योजना से जुड़े।
यहां योजना रही नाकाम
कोविड काल में मनरेगा गांव में रोजगार को गति देने में कामयाब हुई वहीं प्रवासियों को लुभाने में यह योजना खास सफल नहीं हुई। केवल 10 प्रवासियों को ही योजना के तहत लाभ मिला। प्रवासियों में श्रमिक काम से जुड़े कम लोग होने की वजह से मनरेगा के प्रति उनका कम रुझान रहा।
शहरीकरण का दबाव झेलती थी योजना
पहले जब हल्द्वानी ब्लॉक में 84 ग्राम पंचायतें थीं तब मनरेगा के तहत कई गांव ऐसे थे जिनमें काम नहीं हुआ था। मल्ली बमोरी, तल्ली बमोरी, मुखानी ऐसी ग्राम सभाएं थीं जिनमें मनरेगा का कोई मजदूर ही नहीं मिला। बाद में 24 ग्राम सभाएं नगर निगम में शामिल हो गईं। अभी शहर से लगीं कुछ ग्राम सभाओं में मनरेगा के लिए मजदूर मिलना मुश्किल हो जाता है।
व्यक्तिगत कामों में पात्रों से ही निर्माण कार्य करवाने से मनरेगा में गति आई है। इसके लिए लोग आवेदन कर रहे हैं। - निर्मला जोशी, बीडीओ, विकासखण्ड हल्द्वानी