देहरादून। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में शोधार्थी, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता दीवान नगरकोटी पर केंद्रित स्मृति पुस्तक यादों में दीवान नगरकोटी का अनावरण किया गया।
पुस्तक में उनके साथियों के संस्मरणों के साथ उनके लेख और दुर्लभ छायाचित्र संकलित हैं। वक्ताओं ने दीवान नगरकोटी के शोध, पत्रकारिता और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को याद करते हुए उन्हें उत्तराखंड के सामाजिक सरोकारों से जुड़ी बौद्धिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। पुस्तक का संपादन अरुण कुकसाल, जगमोहन रौतेला और चंद्रशेखर तिवारी ने किया है। गिरि विकास अध्ययन संस्थान, लखनऊ के निदेशक और दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के वर्तमान अध्यक्ष प्रो. बीके जोशी ने दीवान नगरकोटी के असामयिक निधन को एक बड़ा आघात बताया। उन्होंने बताया कि दीवान नगरकोटी ने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन में प्रशिक्षक के रूप में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उनका रुझान पत्रकारिता की ओर भी रहा और उन्होंने अल्मोड़ा में पत्रकार के रूप में अपनी पहचान बनाई। उनके जीवन की यात्रा शोध से पत्रकारिता और फिर सामाजिक कार्य तक फैली रही जिसमें पहाड़ के समाज और उसकी समस्याओं के प्रति उनकी प्रतिबद्धता स्पष्ट थी। कार्यक्रम में प्रवीन भट्ट, रानू बिष्ट, डीके पांडे, ललता प्रसाद, राजेंद्र कुकसाल, सुंदर सिंह बिष्ट, प्रेम पंचोली, कल्याण सिंह रावत, बंसती बिष्ट, योगेश भट्ट, राहुल कोटियाल, हेम पंत, दयाल पांडे आदि लोग उपस्थित रहे।