आपदा के बाद उत्तराखंड में मंदी की मार झेल रहे पर्यटन व्यवसाय को उबारने के उद्देश्य से मालाकुंठी (गूलर) में राज्य सरकार के सहयोग से आयोजित तीन दिनी अधिवेशन टूरिज्म प्रमोशन के नाम पर मांस-मदिरा, मौज-मस्ती और दिखावाभर साबित हुआ।
न कोई चिंतन हुआ और न ही कोई निष्कर्ष
इसमें आपदा से राज्य में पैदा हुई दुश्वारियों को दूर करने और पर्यटकों को उत्तराखंड की वादियों की ओर आकर्षित करने के लिए न कोई चिंतन हुआ और न ही कोई निष्कर्ष निकल पाया।
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इस आयोजन के लिए राज्य पर्यटन विभाग द्वारा दिए गए 25 लाख रुपए पानी की तरह बहाए गए, मगर जिम्मेदार अफसरों ने आयोजन के प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं समझी।
उद्घाटन सत्र में औपचारिक शिरकत को छोड़ दें तो विभागीय अधिकारियों ने ही आयोजन से दूरी बनाकर रखी।
सरकार और जिम्मेदार विभाग ने यहां जुटे टूर ऑपरेटरों से राज्य में पर्यटन व्यवसाय को बढ़ाने के लिए किए जाने वाले कारगर उपायों, सहयोग और मौजूदा स्थितियों से उबरने पर चर्चा तक नहीं की।
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इतना ही नहीं स्थानीय चुनिंदा लोगों को छोड़ दें तो इस आयोजन में स्थानीय टूर ऑपरेटर्स, राफ्टिंग, बीच व्यवसायियों और आसपास के लोगों को भी शामिल नहीं किया गया।
अधिवेशन में शामिल हुए प्रतिभागियों ने भी अधिकांश वक्त पर्यटन विकास पर चिंतन और वर्तमान समस्या के स्थायी समाधान पर चर्चा की बजाए मौज मस्ती में बिताया और अपने प्रांतों को चलते बने।
खानापूर्ति रहा समापन सत्र
गुरुवार को अधिवेशन का समापन सत्र खानापूर्ति बनकर रह गया। सुबह देवप्रयाग से व्यासघाट तक रिवर राफ्टिंग करते हुए तमाम प्रतिभागी टूर ऑपरेटर दोपहर करीब दो बजे मालाकुंठी स्थित कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे।
चंद मिनटों में ही औपचारिकताएं पूरी कर अधिवेशन के समापन की घोषणा की दी गई।
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कार्यक्रम का क्या निष्कर्ष रहा, टूरिज्म प्रमोशन के लिए सरकार को दिए गए सुझावों, गैर सरकारी स्तर पर इसके लिए किए जाने वाले प्रयासों, स्थानीय ऑपरेटर्स की भूमिका आदि बिंदुओं पर कहीं कोई जिक्र नहीं हुआ।
इस मौके पर एडवेंचर टूर आपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के एक्जीक्यूटिव कमेटी के मेंबर राजेश ओझा, वैभव काला, प्रतीक कालिया आदि मौजूद थे।
नेपाल के टूर ऑपरेटर गायब
अधिवेशन में शामिल नेपाल से पहुंचे टूर ऑपरेटर अधिवेशन को आधे में ही छोड़कर चलते बने। बताया जा रहा है कि अधिवेशन में नेपाल के महज आधा दर्जन टूर ऑपरेटरों ने ही शिरकत की थी।
जो पहले दिन उपस्थिति दर्ज कराने के बाद बीते दिवस आधे कार्यक्रम के बाद ही स्वदेश लौट गए।
गंगा तट पर मांस और मदिरा की महफिलें
मोक्षदायिनी के तट पर आयोजित अधिवेशन में जमकर मांस और मदिरा की महफिलें सजी। जीएमवीएन सूत्रों ने मुताबिक, अधिवेशन के पहले दिन पर्यटन विभाग के आला अधिकारियों की मौजूदगी में ही जमकर जाम छलके और मांस परोसा गया।
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वहीं, गुरुवार को समापन सत्र के बाद दोपहर के भोजन में भी चिकन-मटन के बाकायदा अलग स्टाल लगाए गए थे।
तीन दिवसीय अधिवेशन प्रदेश के हित में होगा। टूर ऑपरेटरों ने कई सुझाव दिए हैं, जिन पर प्रदेश सरकार नीतिगत निर्णय लेगी। अधिवेशन के माध्यम से सरकार आपदा के बाद उत्तराखंड में सब ठीक है, यह संदेश देश और दुनिया को देना चाहती है। उम्मीद है कि इसका प्रदेश सरकार और पर्यटन व्यवसाय को लाभ मिलेगा।
- उमाकांत पंवार, पर्यटन सचिव