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उत्तराखंड में दवा संकट: जीवन रक्षक दवा भी खत्म

Wed, 03 Feb 2016 11:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में दवाओं का संकट गहरा गया है। सामान्य दवाओं के साथ ही कई जीवन रक्षक दवाएं भी खत्म हो गई हैं। दवाएं उपलब्ध नहीं होने से सर्वाधिक संकट पर्वतीय क्षेत्रों में गहराएगा, जहां मरीज पूरी तरह से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर आश्रित हैं। शासन स्तर से महानिदेशालय को 23 करोड़ रुपये जारी हो चुके हैं, लेकिन औषधि क्रय नीति की पेचीदगी के चलते फिलहाल अगले दो सप्ताह तक दवा खरीद की संभावना नहीं है।
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स्वास्थ्य महानिदेशालय के स्तर से सरकारी अस्पतालों को कुछ दवाएं भेजी गई हैं, लेकिन यह नाकाफी हैं। अस्पतालों से सामान्य रोगों के साथ ही गंभीर रोगों की दवाओं की मांग भी भेजी जा रही है। हालांकि, निदेशालय स्तर पर भी यह दवाएं उपलब्ध नहीं हैं।

गंभीर रोगों की दवाएं भी खत्म
वहीं, दून अस्पताल समेत कई अन्य अस्पतालों में गंभीर रोगों की भी दवा खत्म हो गई है। स्वास्थ्य महानिदेशक डा. कुसुम नरियाल ने इस संबंध में मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी से मुलाकात कर दवाओं की स्थिति के संबंध में जानकारी दी। मंत्री ने जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन नई खरीद की प्रक्रिया के लिए दो सप्ताह का कम से कम समय और लगेगा
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न्यूरो, मिर्गी, मनोरोग, थायराइड, लिवर की दवा खत्म

राज्य के सबसे बड़े अस्पताल दून में अब गंभीर रोगों की दवा भी खत्म हो गई है। अस्पताल में सामान्य रोगों व इमरजेंसी में इस्तेमाल होने वाली ज्यादातर दवाएं पहले ही खत्म हो चुकी हैं। आलम यह है कि अस्पताल में उपलब्ध कराई जाने वाली 100 में से 18 दवाएं पूरी तरह खत्म हैं, जबकि अन्य दवाओं का स्टॉक भी खत्म होने के कगार पर है।

इन दवाओं का स्टॉक खत्म
दवा ----- उपयोग
एल्प्राजोलाम- हृदय रोग व घबराहट
कार्बमाजेपिन- मिर्गी व न्यूरो
इकोस्प्रिन- केलोस्ट्रॉल (ब्लड थिनर)
थायरोक्सिन- थायराइड
एस्थेमिन फोर्ट- विटामिन बी कांप्लेक्स
सायफोलिक
ल्यूपिजाइम- लीवर
एनपेटे क्रीम- पाइल्स
एमोक्सी क्लेव- एंटीबायटिक
सोडियम वेलप्रेट-500- न्यूरोग, मनोरोग
फिनोटोई सोडियम (इपसोलिन)- न्यूरोग, मनोरोग
एल्कासोल- यूटीआई
फिनाबरबीटोन-न्यूरो, मनोरोग
मेट्रोजिल सिरप- बच्चों के दस्त
फिरेजिम- मनोरोग
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जेनेरिक दवाओं की भी हुआ टोटा

दून अस्पताल में दवा खत्म होने के साथ ही जेनेरिक स्टोर में भी दवाओं का टोटा है। जन औषधि केंद्र में हालांकि कुछ समय पूर्व ही दवाओं की आपूर्ति की गई है, लेकिन यहां कई जरूरी दवाओं की कमी है। कई ऐसी दवाएं भी हैं, जिनका जेनेरिक विकल्प उपलब्ध नहीं है।

नई खरीद नीति आ रही आड़े
नई औषधि क्रय नीति की विसंगतियों के चलते दवाओं की खरीद ठप पड़ी है। स्वास्थ्य महानिदेशालय के स्तर से विभागीय मंत्री को भी इस आशय की जानकारी दी गई है। महानिदेशालय बीच का रास्ता निकालकर दवाओं की व्यवस्था करने का प्रयास कर रहा है, जिसमें दो सप्ताह से ज्यादा का समय लग सकता है।

इनका है कहना
वैकल्पिक व्यवस्था बनाने में कम से कम दो सप्ताह का समय लग सकता है। ऐसे में फिलहाल दवाओं की खरीद होने की संभावना नहीं है।
-डॉ. कुसुम नरियाल, स्वास्थ्य महानिदेशक

ज्यादातर गंभीर बीमारियों की दवाएं लंबे समय तक चलती हैं, जिनकी कीमत भी ज्यादा होती है। ऐसे में इन रोगियों को बाजार से महंगे दाम पर दवा खरीदनी होगी।
-बीएस कलूड़ा, जिला फार्मेसी अधिकारी

-दवाओं के खत्म होने और कमी के संबंध में अधिकारियों को सूचना दे दी गई है।
-अनिल उनियाल, मुख्य फार्मासिस्ट
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