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सब डिवीजनल चार्ज कम करने को शासन से गुहार लगाएगा एमडीडीए

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देहरादून। नक्शे पास करने के दौरान लिए जाने वाले सब डिवीजनल चार्ज को कम करने के लिए एमडीडीए अब शासन से गुहार लगाएगा। एमडीडीए ने बोर्ड बैठक में भी इसका प्रस्ताव रखा था। हालांकि, उस पर कोई निर्णय नहीं हुआ। चार्ज कम होने से प्रदेश के लाखों लोगों को फायदा होगा।
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एमडीडीए समेत सभी विकास प्राधिकरण में नक्शा पास करते समय सब डिवीजनल चार्ज लिया जाता है। इस चार्ज का उपयोग नक्शा पास कराने वाले भवन के आसपास सुविधाओं का विकास और लैंड डेवलपमेंट के लिए किया जाता है। यही कारण है कि अविकसित या अर्द्धविकसित कॉलोनियों में इसकी दरें अपेक्षाकृत ज्यादा हैं। अविकसित कॉलोनी में आवासीय भवन के लिए सर्किल रेट का दो फीसदी और गैर आवासीय भवन के लिए सात फीसदी सब डिवीजनल चार्ज देना होता है। विकसित कॉलोनी में आवासीय भवन पर एक और गैर आवासीय भवन पर पांच फीसदी सब डिवीजनल चार्ज लगता है। सब डिवीजनल चार्ज की दरों में कुछ समय पहले ही बढ़ोतरी की गई थी। दरों में इजाफा होने से लोगों की जेब पर आर्थिक बोझ बहुत अधिक बढ़ गया है। इसके बाद अब एमडीडीए इसको कम करने का प्रस्ताव शासन को भेज रहा है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी सब डिवीजनल चार्ज को कम करने पर अपनी सैद्धांतिक सहमति दे चुके हैं।
ऐसे समझें आर्थिक बोझ का गणित
किसी भी प्लॉट पर प्लॉट साइज गुणा सर्किल रेट का सात फीसदी सब डिवीजनल चार्ज लिया जाता है। उदाहरण के लिए 100 वर्ग मीटर के प्लॉट का सर्किल रेट अगर 20 हजार रुपये है तो इस पर सात फीसदी की दर से एक लाख 40 हजार रुपये सब डिवीजनल चार्ज देना होगा। पहले दो प्रतिशत की दर से चार्ज लगता था। इसमें 40 हजार रुपये देने होते थे। इस लिहाज से देखा जाए तो सब डिवीजनल चार्ज में तीन गुना से भी ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।
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सब डिवीजनल चार्ज के रूप में उन पर लोगों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है। हमने बोर्ड के सामने भी सब डिवीजनल चार्ज को कम करने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि उस पर फैसला नहीं हो सका। अब हम सीधे शासन को इसका प्रस्ताव भेज रहे हैं। इससे प्रदेश के लाखों लोगों को फायदा मिलेगा।
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-रणवीर चौहान, वीसी, एमडीडीए
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