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बिल्डरों ने गलती नहीं सुधारी तो गिरेगी गाज

Mon, 12 Jan 2015 11:56 AM IST
मनमीत रावत/ अमर उजाला, देहरादून
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राजधानी में समूह आवासीय योजनाएं (ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट) बना रहे बिल्डरों के पास ‘गलती’ सुधारने के लिए अभी एक साल का वक्त बचा है।
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दरअसल, मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की ओर से बिल्डरों को आवासीय योजनाओं का काम पूरा करने के लिए पांच साल का वक्त दिया जाता है। शहर में चल रही अधिकतर आवासीय योजनाएं वर्ष 2011 में मंजूर हुई थीं, जिनकी समय सीमा वर्ष 2016 में पूरी हो रही है।

नियमानुसार आवासीय योजना में निर्बल आय वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के फ्लैट भी होने चाहिए। ऐसे में प्राधिकरण बिल्डरों को नोटिस भेज इस नियम की याद दिला रहा है। अब तक सौ बिल्डरों को नोटिस भेजा जा चुका है। अगले वर्ष प्राधिकरण सभी आवासीय योजनाओं की जांच शुरू करेगा। जहां निर्बल आय वर्ग फ्लैट नहीं मिलेंगे, वहां नक्शा निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
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चार साल पहले बदला नियम
वर्ष 2006 में प्रदेश की पहली ‘रियल स्टेट पॉलिसी’ आई थी। इसमें समूह आवासीय योजना में दस से 15 प्रतिशत निर्बल आय वर्ग (ईडब्ल्यूएस) फ्लैट बनाने का प्रावधान था। ये फ्लैट बिल्डरों को ही बेचने थे।

वर्ष 2011 में शहरी विकास मंत्रालय ने नियमावली में बदलाव किए, जिसके तहत अब बिल्डर को निर्बल आय वर्ग के फ्लैट बनाकर प्रदेश सरकार को सौंपने होंगे।

इन फ्लैट की बिक्री प्राधिकरण अपने नियमों के अनुरूप करेगा। नियमावली में यह भी स्पष्ट है कि नक्शा पारित होने के बाद बिल्डर को काम पूरा करने के लिए पांच साल का समय दिया जाएगा।

कैसे बांधें आंखों पर पट्टी
प्राधिकरण से नक्शा पारित करवाते वक्त बिल्डरों ने निर्बल आय वर्ग के फ्लैट बनाने का उल्लेख किया है। सूत्र बताते हैं कि अब तक किसी बिल्डर ने ऐसे फ्लैट नहीं बनाए हैं।

अब प्राधिकरण ने नोटिस भेजा है और यह भी साफ है कि नियमों के तहत कार्रवाई हुई तो नक्शा निरस्त होना पक्का है। दूसरी ओर, अगर किसी ने जनहित याचिका डाल दी तो मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

ऐसे में इन दिनों बिल्डर बीच का रास्ता तलाशने की जुगत में हैं। सूत्रों के मुताबिक यह सवाल बिल्डरों को परेशान कर रहा है कि जांच शुरू हुई तो प्राधिकरण की आंखों में पट्टी कैसे बांधी जाए।

इसलिए नहीं बनाते
सूत्र बताते हैं कि राजधानी में इस वक्त करीब 2000 करोड़ रुपए के निवेश से आवासीय योजनाएं बन रही हैं। अधिकतर योजनाओं में फ्लैट की कीमत 30-35 लाख रुपए से शुरू होती है।

बिल्डर मानते हैं कि निर्बल आय वर्ग के फ्लैट से उनकी योजना का ‘क्लास’ खराब हो सकता है। इससे फ्लैट खरीदने आने वाले लोग बिदक सकते हैं।

दूसरी ओर, बिल्डर ये फ्लैट बना भी दें तो इसका लाभ उन्हें नहीं मिलेगा, क्योंकि इन्हें प्राधिकरण द्वारा बेचा जाना है। ऐसे में जेब और ‘क्लास’ के फेर में बिल्डर निर्बल आय वर्ग के फ्लैट बनाने को तवज्जो नहीं देते।

मिल सकती है तीन साल की राहत
वर्ष 2016 तक पूरी न हो पाने वाली आवासीय योजनाओं को कुछ राहत मिल सकती है। नियमावली के अनुसार काम पूरा न होने पर नक्शे की मियाद दो से तीन साल बढ़ाई जा सकती है। लेकिन, जिन योजनाओं का काम पूरा हो चुका है, उनकी गर्दन नपनी तय है।
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नियमानुसार प्राधिकरण पांच साल बाद निर्माण पूरा होने पर जांच करता है। नियमावली में निर्बल आय वर्ग का स्पष्ट उल्लेख है। प्राधिकरण की टीम आवासीय योजनाओं की जांच शुरू करेगी तो नियम तोड़ने वाले बिल्डर किसी सूरत में नहीं बच सकेंगे।
- बंशीधर तिवारी, सचिव, मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण
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