मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) अब रिस्पना और बिंदाल नदी में बिजली बनाएगा। रिवर फ्रंट डेवलपमेंट स्कीम में दोनों नदियों को चैनलाइज करने के बाद बिजली उत्पादन के प्रोजेक्ट पर काम शुरू होगा। आईआईटी रुड़की का वैकल्पिक जल ऊर्जा केंद्र परियोजना की डीपीआर तैयार करेगा।
आरएफडी के तहत रिस्पना और बिंदाल नदियों के करीब 36 किलोमीटर हिस्से को चैनलाइज किया जाना है। चैनलाइज करने के बाद ऐसे सभी हिस्सों को चिह्नित किया जाएगा, जो सूखे रहेंगे। उन क्षेत्रों में सोलर प्लांट लगाकर बिजली उत्पादन किया जाएगा। इसके लिए एमडीडीए ने आईआईटी रुड़की के वैकल्पिक जल ऊर्जा केंद्र से हाथ मिलाया है। इससे जहां एक ओर बिजली उत्पादन हो सकेगा वहीं नदी के ऊपर सोलर पैनल लगे होने से गंदगी भी नहीं डाली जा सकेगी।
प्रारंभिक सर्वे के आधार पर नदी में सोलर पैनल से 40 से 50 मेगावाट विद्युत उत्पादन का अनुमान है। इस बिजली को बेचकर एमडीडीए को राजस्व की प्राप्ति भी होगी। आईआईटी इस पूरे प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार करने के साथ ही तकनीकी सहयोग भी करेगा। विदेशों में सोलर बिजली उत्पादन में इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। भारत में इस तरह का यह पहला प्रोजेक्ट होगा।
खर्च-कमाई का निकालेंगे गणित
परियोजना पर काम करने से पहले एमडीडीए और आईआईटी की टीम पूरे प्रोजेक्ट में खर्च और कमाई का गुणा-भाग करने में जुटे हैं। इसके तहत प्रोजेक्ट से होने वाले फायदे और नुकसान का भी विश्लेषण किया जा रहा है।
प्रोजेक्ट की फिजिबिलिटी देखी जा रही है। आईआईटी रुड़की डीपीआर तैयार करने के साथ ही तकनीकी सहयोग के लिए भी तैयार है। इससे जहां कुछ आय अर्जित होगी वहीं नदी में कूड़ा डालना भी आसान नहीं रहेगा।
- पीसी दुमका, सचिव, एमडीडीए