दाल भात मुझे का काफी पसंद था’। 20 साल के बाद वे हरियाणा में बस गईं। आज माता-पिता की यह सोच है कि बेटियों के लिए आने-जाने का समय तय होता है लेकिन सबके लिए इस तरह की बंदिशें नहीं होती है। उन्होंने माता-पिता को बेटों के रात को घर से बाहर जाने पर पाबंदी लगाने की बात कही।
कहा कि उत्तराखंड में पहले महिलाओं की स्थिति अच्छी थी। दुराचार की घटनाएं नहीं होती थी, लेकिन अब छेड़खानी और दुराचार की वारदातें हो रही है। बेटियों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। बेटियों के प्रति मां-बाप का उद्देश्य यह नहीं होना चाहिए कि 18 साल होते ही शादी कर दो, बल्कि बेटियों को पैरों पर खड़ा करने की सोच होनी चाहिए।