लगभग 19 महीने कांग्रेस में बिताने के बाद उत्तराखंड के दिग्गज नेता मातंबर सिंह कंडारी गुरुवार को भाजपा में वापस आए तो पार्टी के प्रति उनका अंदाज भी बिल्कुल इसी तरह का था।
भाजपा छोड़ने के लिए माफी मांगी
भावुक भी हुए, शेरो शायरी की और पार्टी के बड़े नेताओं से सार्वजनिक तौर पर भाजपा छोड़ने के लिए माफी मांगी। बोले, पार्टी तो मां होती है, यही समझो कि मैंने अपनी मां को छोड़ दिया था।
कंडारी की भाजपा में ज्वाइनिंग को लेकर 18 दिन से पसरा सन्नाटा आज आखिर टूटा। भाजपा मुख्यालय के मुख्य द्वार पर पहुंचे तो कदम ठिठके, इधर उधर देखा। पीछे चल रहे कार्यकर्ता जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे।
लंबे समय बाद मुख्यालय पहुंचे तो खुशी में भावुकता लबालब थी। पीछे देखा और बुके हाथ में लिया। गेट पर ही प्रवक्ता मुकेश महेंद्रा ने कंडारी को रिसीव किया और अंदर ले गए।
पार्टी छोड़ना बुरे कर्मों की सजा
भीतर बैठे प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत को बुके दिया और कुछ समय के लिए भावुक हो उठे। गर्दन हिलाते हुए कहा कि भाजपा छोड़ना गलत फैसला था, शायद किसी जनम के बुरे कर्मों की सजा रही होगी।
मेन हॉल में कार्यक्रम शुरू हुआ, समर्थक पहले से ही जमा थे। प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत जैसे प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए आए तो कंडारी भी आकर कार्यकर्ताओं के बीच बैठ गए। तीरथ ने मंच पर बुलाया और स्वागत किया।
मातबर ने जैसे ही माइक पकड़ा, पहले तो राजनाथ सिंह, बीसी खंडूड़ी, भगतदा, त्रिवेंद्र, तीरथ से भाजपा छोड़ने के लिए माफी मांगी। उन्होंने कहा कि अब तो मरने पर भाजपा का ध्वज नसीब हो, यही तमन्ना है।
मुश्किल दिल के इरादे आजमाती है, लेकिन ठोकर ही इंसान को उठना भी सिखाती है, जैसे शेर पेश किए और भावुक हो उठे।
मातबर सिंह कंडारी की राजनीतिक पृष्ठभूमि
:- 1980 से 90 तक रुद्रप्रयाग केजखौली ब्लॉक के प्रमुख रहे
:- 1991 से 96 तक देवप्रयाग से भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए
:- 1997 में पहली बार यूपी में मंत्री बने
:- उत्तराखंड गठन के बाद प्रदेश में कैबिनेट मंत्री व नेता प्रतिपक्ष रहे
:- 2012 में पहला चुनाव हारे
:- 21 सितम्बर 2012 को कांग्रेस छोड़ी, गुरुवार को वापसी