राजधानी देहरादून में डेरा जमाए बैठे शिक्षकों की मौज आ गई है। एक बार फिर से वर्षों से राजधानी में ही अपना ठिकाना बनाए बैठे शिक्षकों की बिन मांगे मुराद पूरी हो गई है।
तबादला नियमावली के अनुसार शिक्षकों के दुर्गम से सुगम और सुगम से दुर्गम में तबादले होने हैं, लेकिन इसके बाद भी देहरादून के शिक्षकों का बाल बांका होता नहीं दिख रहा।
प्रशिक्षु शिक्षकों की नियुक्ति का लाभ
तबादला नियमावली के अनुसार शिक्षकों के दुर्गम से सुगम और सुगम से दुर्गम में तबादले होने हैं, लेकिन प्रशिक्षु शिक्षकों की नियुक्ति के बाद दून के दुर्गम स्कूलों में शिक्षकों के अधिकतर पद भरे जा चुके हैं।
ऐसे में सवाल यह है कि सुगम में कई सालों से जमे शिक्षकों को अब कहां भेजा जाएगा। अनिवार्य स्थानांतरण के तहत जून में चकराता और कालसी ब्लॉक से 58 हेड मास्टरों के सुगम और अति सुगम स्कूलों में तबादले किए गए थे।
आपदा के बाद तबादलों पर रोक
दुर्गम से सुगम में हुए इन तबादलों के बाद 28 हेड मास्टर और 58 सहायक अध्यापकों को भी पहाड़ चढ़ाया जाना था। इनमें कई ऐसे शिक्षक हैं जो 15 से 20 साल से दून के सुगम और अति सुगम स्कूलों में जमे हैं।
लेकिन प्रदेश में आपदा के बाद तबादलों पर रोक और अब प्रशिक्षु शिक्षकों की दुर्गम स्कूलों में नियुक्ति से जनपद के अधिकतर दुर्गम स्कूलों के पद भरे जा चुके हैं।
इनकी भी सुनिए
जिले के दुर्गम स्कूलों के अधिकतर पद नई नियुक्ति से भरे जा चुके हैं। कोई पद रिक्त नहीं हैं, ऐसे में सुगम से दुर्गम में होने वाले अनिवार्य तबादलों को निरस्त किया जाना चाहिए।
-वीरेंद्र सिंह कृषाली, जिला अध्यक्ष प्राथमिक शिक्षक संघ
दुर्गम स्कूलों में पद रिक्त न होने वाली स्थिति से विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। उनके निर्देश के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी।
-पदमेंद्र सकलानी, जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक