सूत्रों के अनुसार हमले में उग्रवादी की एक गोली योगेश के सीने से आर-पार हो गई। घायल हालत में भी योगेश पीछे नहीं हटे। उन्होंने तुरंत पोजिशन ली और दुश्मन के खिलाफ बंदूक तान दी। खून ज्यादा बहने से वह बेहोश हो गए। साथी सैनिकों ने उन्हें कैंप से अस्पताल पहुंचाया तब तक वह देश के लिए जान न्योछावर कर चुके थे।
नगालैंड से चार कुमाऊं रेजीमेंट के सूबेदार जगत सिंह शहीद योगेश का पार्थिव शरीर लेकर दिल्ली पहुंचे। वहां से सीएचएम दिनेश सिंह, नायक हरीश हर्बोला भी साथ हो लिए और सेना के वाहन से लेकर हल्द्वानी पहुंचे। शहीद योगेश के पार्थिव शरीर पर लिपटा तिरंगा जब भाई मुकेश परगाईं को दिया गया तो वह फूट-फूट कर रोने लगे। तिरंगे को सीने से लगाकर उन्होंने भाई की शहादत को सलाम किया और सेना के अफसरों से देश के दुश्मनों का खात्मा करने के लिए कहा।