उत्तराखण्ड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को रिवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग और अन्य जल खेलों के लिए दो सप्ताह में उचित नियम और नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। तब तक के लिए प्रदेश में इन पर रोक लगा दी गई है। यह प्रतिबंध आज से लागू हो गया है।
इस फैसले से एडवेंचर स्पोर्ट्स के कारोबार से जुड़े उद्यमियों की चिन्ताएं बढ़ गई हैं। भीमताल, नौकुचियाताल, पांडेगांव में पैराग्लाइडिंग, जोरिंग, कायकिंग बंद होने से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रुप से एक हजार से अधिक लोग बेरोजगार हो गए।
बेरोजगार होने से युवाओं के सामने रोजी रोटी पर संकट मंडराने लगा है। एडवेंचर से जुड़े संचालकों ने शासन और सरकार से इस समस्या को गंभीरता से हल करने की मांग की है। उन्होंने सरकार से एडवेंचर पर ठोस रणनीति बनाकर हाईकोर्ट के सामने पेश करने की मांग की है।
एडवेंचर से जुड़े नितिन राणा, संजू मेहरा, दीपू मेहरा, मनोज पोखरिया, धीरु पांडे, यश पोखरिया, गिरीश कुमार, भुवन उप्रेती, नितेश बिष्ट, राकेश बृजवासी ने सरकार से इस समस्या का समाधान कर बेरोजगार हुए हजारों लोगों को रोजगार देने की मांग की है।
कोर्ट में वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई थी। ऋषिकेश निवासी हरिओम कश्यप ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सरकार ने 2014 में भगवती काला व वीरेंद्र सिंह गुसाईं को राफ्टिंग कैंप लगाने के लिए कुछ शर्तों के साथ लाइसेंस दिया था।
इन्होंने शर्तों का उल्लंघन करते हुए राफ्टिंग के नाम पर गंगा नदी के किनारे कैंप लगाने शुरू कर दिए। गंगा नदी के किनारे मांस मदिरा का सेवन, डीजे बजाना प्रचलित हो गया। गंदा पानी और कूड़ा आदि भी नदी में डाला जा रहा है।
मामले में खंडपीठ ने सरकार को आदेश दिए हैं कि वे नदी के किनारे उचित शुल्क के बिना लाइसेंस जारी नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा कि खेल गतिविधियों के नाम पर अय्याशी करने की स्वीकृति नहीं दी जा सकती।
राफ्टिंग कैंपों के संचालन की नदी किनारे स्वीकृति देने से नदियों का पर्यावरण दूषित हो रहा है। कोर्ट ने सरकार को रिवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग और अन्य जल खेलों के लिए उचित कानून बनाने का आदेश दिया है। कहा कि जब तक कानून नहीं बनता तब तक इन सब की अनुमति न दी जाए।
कोर्ट ने दी थी यह टिप्पणी
साफ देखा जा सकता है कि रिवर राफ्टिंग के नाम पर नदी में वाहनों को ले जाने दिया जा रहा है। याची की ओर से उपलब्ध कराए गए फोटो में साफ दिख रहा है कि लोग नदी के पानी में पिकनिक मना रहे हैं, शराब पी रहे हैं।
रिवर बैड को लीज पर देकर सरकार गंगा नदी की पवित्रता को बनाए नहीं रख पाई है। पर्यटन को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, लेकिन गतिविधियों का नियमन भी होना चाहिए। मनोरंजन के लिए खेल की अनुमति का आपदा में अंत होने नहीं दिया सकता है।