एक साल की जद्दोजहद के बाद आखिर देहरादून जिला प्रशासन ने शहीद मनोज राणा की बहन को सरकारी नौकरी दे दी।
गोर्खा मूल की होने से नहीं बन रहा था प्रमाण पत्र
ओबीसी प्रमाणपत्र न होने के कारण पिंकी की ज्वाइनिंग लटकी हुई थी। गोर्खा मूल की होने के कारण उसका प्रमाणपत्र भी नहीं बन रहा था। सोमवार को प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना संग पहुंची पिंकी ने सेवायोजन कार्यालय में कनिष्ठ लिपिक के पद पर ज्वाइनिंग दी।
धस्माना ने बताया कि वह तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को लेकर शहीद मनोज राणा के ढाकपट्टी राजपुर स्थित आवास में गए थे। तब मुख्यमंत्री ने शहीद की बहन पिंकी राणा को सरकारी नौकरी तथा शहीद के नाम पर चंद्रलोक बस्ती में द्वार बनाने की घोषणा की गई थी।
हरीश रावत से मिली पिंकी
बताया कि पिंकी को क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय में नौकरी दी भी गई, लेकिन ओबीसी प्रमाणपत्र न होने से ज्वाइनिंग नहीं हो सकी। पिंकी को गोर्खा सुधार सभा ने प्रमाणपत्र जारी किया था, लेकिन जिला प्रशासन ने इसे नहीं माना। एक साल तक पिंकी और परिजन भटकते रहे।
कुछ समय पूर्व जानकारी मिलने पर वह पिंकी को लेकर सीएम हरीश रावत से मिले। सीएम ने तुरंत डीएम को गोर्खा सुधार सभा के प्रमाणपत्र के आधार पर ज्वाइनिंग देने के लिए कहा। सोमवार को उसे ज्वाइनिंग मिल गई।
धस्माना ने कहा कि पिंकी की नौकरी से अब शहीद का परिवार बेहतर जीवन जी सकेगा। उन्होंने सीएम के साथ डीएम का आभार जताया।