भारत-पाक 1965 युद्ध में अपने उत्तराखंड के सपूतों ने बहादुरी की मिसाल कायम की थी। इस युद्ध में उत्तराखंड के 253 जांबाजों ने वतन के लिए शहादत दी थी।
युद्ध के 50 साल पूरे होने पर जीओसी सब एरिया ने आरआईएमसी में सम्मान समारोह हुआ। इस मौके पर एक ओर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजली दी गई तो दूसरी ओर 33 सैनिकों और वीरांगनाओं को सम्मानित किया गया।
राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज(आरआईएमसी) के थिमैय्या ऑडिटोरियम में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। सबसे पहले सेना के वरिष्ठ अफसरों, जवानों ने लाल गेट वार मेमोरियल पर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे सब एरिया मुख्यालय के जनरल आफिसर कमांडिंग(जीओसी) मेजर जनरल एस सब्बरवाल ने कहा कि भारतीय सेना के जवानों ने युद्ध में जिस बहादुरी का परिचय दिया था, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता है।
जीओसी ने कहा कि उत्तराखंड सब एरिया मुख्यालय सेना के रिटायर्ड जवानों को हर संभव सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं क्लेमेंटटाउन में 14 वीं सैन्य डिवीजन के जीओसी मेजर जनरल एमएस घूरा ने शहीद स्मारक प्रेरणा स्थल पर श्रद्धांजलि दी। जनरल घूरा ने सैनिक सम्मेलन को भी संबोधित किया। उधर, लाल गेट गढ़ी कैंट में सब एरिया कमांडर सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
उत्तराखंड से 22 सैनिक हुए थे अलंकृत
1965 भारत पाक युद्ध में उत्तराखंड के 22 वीरों को अलंकृत किया गया था। दो महावीर चक्र, 8 वीर चक्र, एक शौर्य चक्र, 6 सेना मेडल और पांच मेंशन इन डिस्पैच उत्तराखंड के शूरवीरों ने हासिल किये थे।
गौरव सेनानी केंद्र के स्टॉल में पूर्व सैनिकों को कई जानकारियां दी गई। सेवानिवृत्त मेजर जनरल सी नंदवानी, सब एरिया मुख्यालय के कर्नल अनुज मैनी, कर्नल वाईएस बिष्ट सहित सेना के वरिष्ठ अधिकारी, जवान समारोह में उपस्थित रहे। पौड़ी से 57, पिथौरागढ़ से 45, बागेश्वर से 36 और चमोली से 32 जवान शहीद हुए थे।
65 के शहीदों को किया नमन
भारत-पाक युद्ध 1965 में शहीद हुए भारतीय सैनिकों को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। इस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का भावपूर्ण स्मरण भी किया गया। इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने मालरोड स्थित गढ़वाल टैरेस के रिंक में स्केटिंग कर श्रद्धांजलि दी।
गंभीर सिंह पंवार ने बताया कि इस युद्ध में सेंट जार्ज कॉलेज के पढ़े किलर्स ब्रदर्स ने पाकिस्तान की हवाई सेना को भारी नुकसान पहुंचाया था। मसूरी के राजकुमार भारद्वाज ने भी इस युद्ध में हिस्सा लिया था। श्रद्धांजलि देने वालों में विजय रमोला, अमित भट्ट, मनीष कुकसाल, रमेश जायसवाल आदि शामिल थे।