पिता काफी दिनों से चित्रेश पर छुट्टी पर आने का दबाव बना रहे थे, लेकिन शायद होनी को यही मंजूर था। मां बेटे को याद कर रोती रही, तुम कहां चले गए। मां से जो वादा करके गए थे, उसे अब कौन पूरा करेगा। भाई नीरज बिष्ट का कहना था कि वो तो परिवार के साथ सोनू (चित्रेश) की शादी की आने की तैयारी में थे, लेकिन वो राष्ट्र की रक्षा में वीरगति को प्राप्त हो गया। भाई तुझ पर पूरे परिवार को गर्व है। तेरा बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।
मेजर चित्रेश बिष्ट की शहादत के सम्मान में सोमवार को आसपास के बाजार बंद रहे। सुबह से ही आसपास के लोगाें का बिष्ट के आवास पर आने का सिलसिला शुरू हो गया था। चित्रेश की अंतिम यात्रा हरिद्वार रवाना होने के बाद इलाके के लोगों ने सड़कों पर उतर पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ अपना आक्रोश जताया। यह तमाम लोग फिर से चित्रेश के आवास पर पहुंच गए, जहां पर वे काफी देर तक चित्रेश अमर रहे के उद्घोष करते रहे। बाद में इन लोगाें ने नेहरू कालोनी स्थित शहीद स्थल पहुंचकर शहीदों को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
पिता एसएस बिष्ट बेटे चित्रेश के अंतिम संस्कार में भी हरिद्वार जाना चाहते थे। वो नाते-रिश्तेदार के साथ घर से निकल भी गए थे, लेकिन रास्ते में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अपने समर्थक के साथ उन्हें मिल गए। रावत उन्हें समझा-बुझाकर वापस घर ले आए, क्याेंकि उनकी तबीयत भी सही नहीं थी। बिष्ट को यह भी तर्क दिया गया कि जवान बेटे की मौत होने पर पिता अंतिम क्रिया में शामिल नहीं होते।
साथी की अंतिम विदाई पर फफक पड़े सैन्य अधिकारी
शहीद मेजर चित्रेश की अंतिम यात्रा में सैन्य अफसर काफी संख्या में शामिल हुए। इनमें मेजर डीसी रमोला, गौरव तिवारी, अक्षय अरोरा, विपुल कोटनाला आदि मेजर चित्रेश के साथ रहे हैं। अंतिम यात्रा शुरू हुई तो यह सैन्य अधिकारी भी चित्रेश को याद कर रोने लगे। सैन्य अधिकारियों का कहना था कि चित्रेश बम और सुरंग को डिफ्यूज करने में एक्सपर्ट होने के साथ हर समय दूसरे की मदद को तैयार रहता था। ऐसा लगता है कि बारूदी सुरंग को रिमोट से उड़ाया गया है।