हाइकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि विवाहित बेटी भी मृतक आश्रित कोटे में नौकरी की हकदार हो सकती है। कोर्ट ने एक मृतक आश्रित को नौकरी देने के संबंध में प्रत्यावेदन आठ सप्ताह में निस्तारित करने के आदेश दिए हैं। न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की एकलपीठ ने ऊधमसिंह नगर निवासी अंजुला सिंह की याचिका पर यह आदेश दिया।
अंजुला सिंह ने याचिका में कहा था कि उसके पिता डिस्ट्रिक कॉपरेटिव बैंक में क्लर्क-कैशियर के पद पर कार्यरत थे। उनकी मृत्यु 23 फरवरी 2014 को हुई थी। उसने मृतक आश्रित के रूप में नौकरी पाने के लिए विभाग में आवेदन किया था।
विभाग की ओर से पांच मई 2016 को उसका आवेदन इस आधार पर निरस्त कर दिया कि विवाहित युवती परिवार की परिभाषा में नहीं आती है, इसलिए वह नौकरी पाने की हकदार नहीं है।
विभाग के इस आदेश को हाइकोर्ट में चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा कि परिवार को चलाने के लिए बेटा और बेटी दोनों का योगदान होता है, जब विवाहित पुत्र परिवार की परिभाषा में आता है तो पुत्री क्यों नहीं। यह अनुच्छेद 14, 15, 16 का उल्लंघन है। पक्षों की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की एकलपीठ ने मृतक आश्रित याची को नौकरी देने के संबंध में प्रत्यावेदन आठ सप्ताह में निस्तारित करने के आदेश दिए।