राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) आम आदमी की जेब पर भारी पड़ेगी। योजना के तहत नक्शा जमा कराने की फीस कई गुना बढ़ा दी गई है। इसमें आवासीय भवन का नक्शा पांच हजार रुपये में जमा होगा। वहीं, व्यावसायिक नक्शों को जमा करने की फीस भी दोगुनी कर दी गई है। इससे लोगों पर आर्थिक बोझ पड़ना तय है। इसके अलाव अन्य शुल्कों में भी बढ़ोत्तरी की गई है।
सरकार ओटीएस के तहत निर्माण को शमन (कंपाउंडिंग) करने के लिए नियमों में कई तरह की छूट का लाभ देती है। इसके तहत सड़क, सेट बैक, फ्लोर एरिया रेश्यो (एफएआर) समेत कई अन्य मानकों में शिथिलता बरती जा रही है, ताकि निर्माण को वैध किया जा सके। लेकिन इसके तहत शुल्क में बढ़ोत्तरी कई गई है। नक्शा जमा कराने की फीस सामान्य तौर पर 215 से 315 रुपये के बीच निर्धारित है। लेकिन योजना के तहत इसे बढ़ाकर 5015 रुपये कर दिया गया है। वहीं, व्यावसायिक नक्शों को जमा करने की फीस 5015 से बढ़ाकर 10015 रुपये कर दिया गया है। खास बात यह है कि फीस पूरी तरह नॉन रिफंडेबल होगी। किसी भी स्थिति में नक्शा रिजेक्ट होने पर यह शुल्क वापस नहीं किया जाएगा।
मल्टी यूनिट का शुल्क भी बढ़ाया
देहरादून। योजना के तहत मल्टी यूनिट निर्माण का शुल्क भी बढ़ा दिया गया है। सामान्यत: मल्टी यूनिट में प्रत्येक यूनिट पर 50 हजार रुपये का शुल्क तय है। यह शुल्क अन्य सभी शुल्कों के अतिरिक्त लिया जाता है। कंपाउंडिंग में इसे बढ़ाकर एक लाख रुपये प्रति यूनिट कर दिया गया है। इससे मल्टी यूनिट का निर्माण करने वालों को भी कंपाउंडिंग के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे।
नक्शा जमा कराने की फीस पहले की तरह कम होनी चाहिए। सरकार को इसमें जनता को राहत देनी चाहिए। कंपाउंडिंग का जो शुल्क होगा, वो तो लोगों को देना ही है। फिर केवल नक्शा जमा कराने की फीस इतनी ज्यादा क्यों ली जा रही है।
सुनील घिल्डियाल, पूर्व महासचिव, एसोसिएशन ऑफ इंजीनियर्स एंड टेक्निकल
योजना के तहत लोगों को कई मानकों में छूट का प्रावधान है। नक्शा जमा कराने की फीस को लेकर मुझे बहुत जानकारी नहीं है। योजना के तहत लोग अपने निर्माण को मानकों में शिथिलता के साथ शमन करा सकते हैं।
रणवीर चौहान, उपाध्यक्ष, एमडीडीए