गांवों में कई स्थानों पर हुआ है भूस्खलन, मकानों में दिख रहीं दरारें
कालसी तहसील के कई गांव आपदा के मुहाने पर हैं। हाल ही के दिनों में हुई बारिश के बाद गांवों में कहीं मिट्टी खिसकने तो कहीं मकानों में दरारें आने की स्थिति सामने आ रही है। जाखन में हुए हादसे के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
देहरादून जिले की कालसी तहसील के क्षेत्र में आने वाले ग्राम खमरोली, ककाड़ी, सिमोग, पाटा और पजिटिलानी आपदा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। मौजूदा बरसात के मौसम में आपदा की सबसे अधिक मार खमरोली गांव को झेलनी पड़ी। इसकी जद में 33 परिवार आ रहे हैं। घर, आंगन, गोशालाओं के अलावा आंगनबाड़ी केंद्र, राजकीय प्राथमिक विद्यालय, शिव मंदिर में दरारें आ रही हैं। जैसे ही चटक धूप खिल रही है दरारें बढ़ रही हैं। गांव के पांच परिवार अपने मकान छोड़कर दूसरे स्थानों पर अपना ठिकाना बना रहे हैं।
यही हाल ककाड़ी गांव का भी है, जहां 11 परिवार खतरे में हैं। इन परिवारों के मकान कभी भी भूस्खलन की चपेट में आ सकते हैं। ग्राम पाटा में छह परिवारों के घरों पर खतरा मंडरा रहा है, जिनमें से एक परिवार को तहसील प्रशासन ने दूसरे स्थान पर शिफ्ट कराया है। ग्राम सिमोग भी भूस्खलन के खतरे की जद में है।
प्रशासन के पास नहीं कोई ठोस योजना
जौनसार बावर क्षेत्र के गांवों में भूस्खलन और मकानोंं में दरार की स्थिति को लेकर प्रशासन के पास कोई ठोस योजना नहीं है। खमरोली निवासी ज्ञान सिंह तोमर, ककाड़ी गांव के पूर्व प्रधान सुल्तान सिंह बिष्ट, जयपाल सिंह बिष्ट, पाटा गांव निवासी परम सिंह खन्ना ने बताया कि प्रशासन के कोई कदम नहीं उठाने के कारण ग्रामीण अपने-अपने हिसाब से गांव में ही एक-दूसरे के यहां शरण ले रहे हैं या फिर अपने घरों में ही रह रहे हैं।
जौनसार बावर क्षेत्र के आपदाग्रस्त गांवाें की स्थिति की रिपोर्ट तैयार करके जिलाधिकारी को भेजी जा चुकी है। रिपोर्ट में भू-धंसाव या भूस्खलन की स्थिति का सर्वे कराने की मांग भी की गई है। इसके अलावा आपदाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा करके आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
- युक्ता मिश्रा, उप जिलाधिकारी, कालसी