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न्यायिक अवमानना के चक्रव्यूह में उत्तराखंड सरकार, शिक्षा सचिव ही नहीं शामिल हैं कई अफसर

Wed, 12 Dec 2018 10:39 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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court - फोटो : PTI
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अदालत की अवमानना में फंसी शिक्षा सचिव भूपिंदर कौर औलख शासन की अकेली अफसर नहीं हैं। समान काम का समान वेतन, वर्कचार्ज कर्मियों की पेंशन व नियमितीकरण के मामले में शासन के कई अफसर अदालतों की अवमानना का सामना कर रहे हैं।

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न्यायिक अवमानना के इस चक्रव्यूह को भेदने के लिए सरकार को सर्वोच्च न्यायालय से गुहार लगानी पड़ रही है। अवमानना के सबसे अधिक मामले लोक निर्माण विभाग और सिंचाई विभाग से संबंधित हैं। इन विभागों में तैनात वर्कचार्ज कर्मचारी पेंशन की मांग कर रहे हैं। लेकिन, सरकार उन्हें नियमित कर्मचारी नहीं मान रही है। लिहाजा उसने उन्हें पेंशन देने से इनकार कर दिया है।

ऐसे मामलों में उच्च न्यायालय से अवमानना के जो आदेश पारित हो रहे हैं, उनके खिलाफ वह या तो सर्वोच्च न्यायालय में जा रही है या विशेष अपील कर रही है। सर्वोच्च न्यायालय में ऐसे मामलों के लिए बड़ी पीठ गठित की है, जिसमें उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड के मामलों की सुनवाई होनी है। प्रदेश सरकार अवमानना के मामलों के इस पीठ के समक्ष ले जा रही है ताकि वहां उसे स्थगनादेश प्राप्त हो सके।
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दिन भर होता रहा मंथन
शिक्षा सचिव के खिलाफ अदालत से आए अवमानना के मामले में मंगलवार को दिन भर मंथन होता रहा। खुद सचिव ने अपने कक्ष में वित्त, न्याय, शिक्षा विभाग के अधिकारियों से आगे की रणनीति पर चर्चा की। 
 

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लोनिवि में 88 याचिकाएं लंबित

वर्कचार्ज कर्मचारियों की पेंशन का दावा करने वाली उच्च न्यायालय में ऐसी 88 याचिकाएं लंबित हैं, जिनमें सरकार पर अवमानना का खतरा मंडरा रहा है। उच्च न्यायालय से भवान सिंह, विक्रम सिंह, सूरत सिंह, उमेद सिंह, तुलसी देवी के मामले में अपर मुख्य सचिव लोनिवि के खिलाफ अवमानना के आदेश पारित हो चुके हैं और इनके खिलाफ विभाग ने सर्वोच्च न्यायालय में गुहार लगाई है। राम प्रताप के मामले में तो मुख्य सचिव पर अवमानना का मामला बना है। लोनिवि को समान काम का समान वेतन के मामले में भी अवमानना का सामना करना पड़ा।  

सिंचाई विभाग में भी कई याचिकाएं
सिंचाई विभाग में बड़ी संख्या कर्मचारियों ने पेंशन के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। इनमें ब्रह्मपाल, ओम प्रकाश, हरिदत्त, दीपचंद हरबोला के मामले में प्रमुख सचिव सिंचाई अवमानना के मामले में फंसे हैं। सिंचाई विभाग भी अवमानना के मामलों के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर रहा है।

सचिव ऊर्जा पर भी अवमानना का मामला
ऊर्जा निगम में उपनल कर्मचारी विनोद कवि व अन्य ने समान काम का समान वेतन के मामले में सचिव ऊर्जा और निगम के एमडी पर अवमानना का मामला बनाया है। उनके मामले में उच्च न्यायालय की एकल पीठ और खंडपीठ ने सरकार और विभाग को समान का काम का समान वेतन देने के आदेश दिए। लेकिन अदालत के आदेश के अनुरूप जब याचिकाकर्ता को लाभ नहीं मिला तो वे दोबारा अवमानना की याचिका लेकर कोर्ट में चले गए। सूत्रों की मानें तो विभाग ने भी अवमानना आदेश के खिलाफ न्यायालय के समक्ष विशेष पुनर्विचार याचिका दायर कर दी। 
  
वर्कचार्ज कर्मचारियों की याचिकाओं और अवमानना के मामलों में शासन स्तर से कार्रवाई हो रही है। विभाग ने अवमानना के मामले में सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अपील कर दी है।
- आरसी पुरोहित

वर्कचार्ज कर्मचारियों की पेंशन के मामले में विभाग के अलग मानदंड हैं। पांच ऐसे मामले हैं, जिनमें लोग न्यायालय में भी नहीं गए उन्हें पेंशन का लाभ दे दिया गया। अदालत का फैसला आने और अवमानना आदेश जारी होने के बाद भी सरकार हीलाहवाली कर रही है और सर्वोच्च न्यायालय में जा रही है। लेकिन हम आखिरी सांस तक लड़ेंगे।
- बाबू खान, प्रदेश अध्यक्ष, लोनिवि, सिंचाई संयुक्त कर्मचारी संघर्ष मोर्चा
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