एक तरफ उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत पहाड़ पर व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की बात कर रहे हैं तो दूसरी ओर उनके पेयजल मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी अपने एक दुलारे इंजीनियर को दुर्गम से दून लाने की तैयारी कर चुके हैं।
इन इंजीनियर का तबादला पांच दिन पहले किया गया है और अभी तक उन्होंने नई जगह पर ज्वाइन तक नहीं किया है। पेयजल निगम में पांच दिन पूर्व अधिशासी अभियंताओं की तबादला सूची जारी की गई थी।
पेयजल निगम निर्माण इकाई (डिफेंस कॉलोनी) के परियोजना प्रबंधक (ईई) अमर ज्योति प्रकाश डोबरियाल को दून से नई टिहरी स्थानांतरित किया गया है।
मंत्री की मेहरबानी से दून में रहेंगे इंजीनियर
सूत्र बताते हैं कि पेयजल मंत्री की मेहरबानी से डोबरियाल को दून में ही रहने की व्यवस्था कर दी गई। डोबरियाल की जगह आए ईई को बता दिया गया है कि उन्हें वापस जाना ही होगा।
मंत्री ने एक साल पहले भी रोका था तबादला
अमर ज्योति प्रकाश डोबरियाल का वर्ष 2012 में तबादला ऊधमसिंह नगर किया गया था। तब भी पेयजल मंत्री ने उन्हें रोक लिया था।
मंत्री का कहना था कि एक साल बाद वह खुद डोबरियाल का तबादला कराने के लिए कहेंगे। एक साल बाद जब डोबरियाल का तबादला किया गया है तो मंत्री ने निगम के एमडी को तबादला रोकने के लिए कहा है।
अन्य अधिकारियों के तबादले भी रोकने की कोशिश
डोबरियाल की जगह ऋषिकेश से ईई सीएस रजवार ने ज्वाइन किया है। सूत्रों के मुताबिक एमडी रजवार को बता चुके हैं कि उनका जाना होगा।
सूत्र तो यह भी बताते हैं कि डोबरियाल के चक्कर में मंत्री ने चार अन्य अधिकारियों के तबादले भी रोकने की कोशिश की है।
यह है तबादला नीति
विभागीय तबादला नीति के अनुसार कोई भी ईई एक जगह पर तीन साल तक रह सकता है। विशेष परिस्थितियों में पांच साल की छूट दी जा सकती है। डोबरियाल दून में पांच साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। अब उनका छठा साल है।
मंत्री कैजुअल्टी में, ईई बारिश में
डोबरियाल के तबादला रोकने के मामले में जब पेयजल मंत्री से बात की गई तो वह टाल गए।
पहले तो पूरी बात सुनी पर अंत में यह कहकर कि मैं अभी कैजुअल्टी में हूं, बाद में बात करूंगा, फोन काट दिया। इसके बाद कई कॉल करने पर फोन नहीं उठाया।
एमएमएस का भी जवाब नहीं दिया। ईई अमर ज्योति प्रकाश डोबरियाल ने भी बारिश में हूं, कहकर बात नहीं की। इसके बाद जब भी उन्हें फोन किया गया तो रिसीव नहीं किया।
ईई अमर ज्योति प्रकाश डोबरियाल ने कहा था कि वह दून में जो काम कर रहे हैं, उनके लिए एक साल का अतिरिक्त समय दिया जाए। किसी अन्य अधिकारी को वह कार्य समझने में वक्त लगेगा। इस तथ्य का निरीक्षण चल रहा है। अभी निर्णय नहीं हुआ है। कोई दूसरा अधिकारी बेहतर काम कर सकता है तो उसे ही मौका देंगे।
- भजन सिंह, एमडी, पेयजल निगम