उत्तराखंड पेयजल निगम में चहेते अफसरों के तबादले रोकने के लिए नियमों को ताक पर रखने वाले पेयजल मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी अब ‘गलती’ सुधारने की बात कह रहे हैं।
उनका कहना है कि कुछ विशेष परिस्थिति के चलते ही ये निर्णय किए गए होंगे। मंत्री ने यह भी कहा कि संबंधित अफसरों को यह छूट कुछ ही दिन के लिए दी गई है।
उनका कहना है कि तबादलों में नियमों के उल्लंघन का पुनरीक्षण किया जाएगा।
मुख्य अभियंता को दिया ज्ञापन
अफसरों के तबादलों पर मंत्री की रोक से भड़के डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के पदाधिकारी बृहस्पतिवार को पेयजल निगम मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने मुख्य अभियंता सुनील कुमार को ज्ञापन दिया।
अध्यक्ष बीके चतुर्वेदी ने बताया कि मुख्य अभियंता ने संशोधन के लिए एक सप्ताह का वक्त मांगा है, लेकिन इस बार आश्वासन पर संघ नहीं मानेगा।
बताया कि आठ अगस्त से मुख्यालय पर धरना शुरू किया जाएगा। ज्ञापन देने वालों में पीएस रावत, योगेंद्र सिंह आदि शामिल रहे।
ऐसे तीन-चार मामले मेरे पास आए थे। सभी की कुछ ना कुछ पारिवारिक दिक्कत थी। मानवता के नाते ऐसे लोगों का साथ देना तो बनता ही है। लेकिन यह छूट सिर्फ एक-दो माह के लिए ही है। किसी को परिस्थितिवश सुगम में भेजना पड़ा है तो जल्द ही उसका दुर्गम में जाना तय है। तबादलों में गलती या नियमों का उल्लंघन जानकारी के अभाव में हुआ है। ऐसे मामले फिर से देखेंगे।
- मंत्री प्रसाद नैथानी, पेयजल मंत्री
पेयजल निगम में दुलारे और भी हैं
पेयजल निगम दून डिवीजन में एई एमएस रावत का तबादला कमलानगर स्थित निर्माण शाखा में कर दिया गया है। उनकी जगह घनसाली से नवनीत कटारिया दून डिवीजन (राजेंद्रनगर) आए हैं। रावत का 11 माह बाद रिटायरमेंट होना है।
तबादला नीति के अनुसार जिस अधिकारी-कर्मचारी की सेवानिवृत्ति को दो वर्ष बचे हों, उसका तबादला उसके इच्छित तीन विकल्पों में से किसी एक जगह किया जाता है। लेकिन रावत से कोई विकल्प नहीं मांगा गया।
दूसरी ओर, कटारिया को निर्माण शाखा में भी लाया जा सकता था। लेकिन दून शाखा को ‘अच्छा’ माना जाता है। ऐसे में उन्हें यहां भेजा गया।
इन पर लगे कई गंभीर आरोप
ईई सुजीत कुमार विकास पर रुद्रप्रयाग की तल्ला नागपुर पेयजल योजना के निर्माण के दौरान कई गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले के सामने आने के बाद सुजीत को देवप्रयाग भेजा गया था।
लेकिन दो साल के भीतर ही उनका तबादला दून डिवीजन में कर दिया गया। खास बात यह है कि सुजीत को ईई एससी पंत के स्थान पर लाया गया है।
पंत को कर्मठ अधिकारी माना जाता है। ऐसे में उन्हें हटाकर दागी अफसर को यहां लाना सवाल खड़े करता है। ये दो मामले साफ करते हैं कि पेयजल निगम में अधिशासी अभियंताओं के तबादलों में किस तरह खेल किया गया है।
पेयजल निगम में मंत्री के दुलारे अभियंताओं में पेयजल निर्माण निगम शाखा के परियोजना प्रबंधक ईई अमर ज्योति प्रकाश डोबरियाल के अलावा कई और भी हैं।
इन चहेतों को सुगम स्थानों पर लाने में नियमों को ताक पर रख दिया गया है। ऐसे में पेयजल मंत्री और निगम के वरिष्ठ अधिकारियों की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।