मनरेगा का बजट खत्म होने से उत्तराखंड राज्य में मजदूरी व निर्माण सामग्री की देनदारी 86 करोड़ तक पहुंच गई है। इस साल अब तक केंद्र से उत्तराखंड को 511 करोड़ रुपये का बजट मिला है।
यह राशि विभिन्न विकास कार्यों पर खर्च हो चुकी है। अब मजदूरी का भुगतान व नए कार्यों को शुरू करने के लिए मनरेगा में पैसा नहीं है। उत्तराखंड ने अक्तूबर माह तक खर्च की गई राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) केंद्र को भेजकर बजट जारी करने की डिमांड की है।
महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत केंद्र की ओर से बजट जारी न होने से राज्य में श्रमिकों की मजदूरी और निर्माण सामग्री का भुगतान अटक गया है। मजदूरी में 56 करोड़ व निर्माण सामग्री में 30 करोड़ रुपये की देनदारी बकाया हो चुकी है।
केंद्र से शीघ्र ही का बजट जारी नहीं होता है तो मनरेगा के माध्यम से पंचायत स्तर पर चल रहे कार्योँ की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। इसके लिए प्रदेश सरकार ने केंद्र से बजट मांगा है। वर्ष 2016-17 से लेकर इस साल अक्तूबर तक मनरेगा में खर्च की गई राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र केंद्र को भेजे गए। जिसके आधार पर ही केंद्र सरकार मनरेगा की अगली किश्त जारी करेगी।
मनरेगा के राज्य समन्वयक डॉ. महेश कुमार ने बताया कि मनरेगा के तहत इस साल अब तक 511 करोड़ रुपये की राशि मिली है। यह राशि विकास कार्यों पर खर्च हो चुकी है। व्यय राशि के यूसी केंद्र को भेज कर बजट मांगा गया है।