गंगा भागीरथी की अपस्ट्रीम में जमा मलबा विद्युत उत्पादन पर भारी पड़ रहा है। पानी के साथ बहकर आ रही रेत बजरी मनेरी और जोशियाड़ा बैराज जलाशय में जमा होने से यहां हेडलॉस (टरबाइन में कम पानी पहुंचना) की स्थिति बन रही है। शनिवार शाम को मनेरी और रविवार सुबह जोशियाड़ा बैराज से फ्लशिंग कर रेत बहानी पड़ी। इस दौरान तिलोथ और धरासू विद्युत गृह में घंटों उत्पादन ठप रहा। इससे जल विद्युत निगम को करीब 2.5 मिलियन यूनिट के उत्पादन हानि हुई।
बीते सालों की बाढ़ में बहकर आया भारी मलबा गंगोत्री की ओर गंगा भागीरथी की अपस्ट्रीम में जमा है। अब नदी में बढ़ रहा पानी अपने साथ रेत-बजरी बहाकर ला रहा है, जिससे मनेरी और जोशियाड़ा बैराज जलाशय मलबे से पट जाने के कारण जलाशय की जलभरण क्षमता कम होने से विद्युत गृह में हेडलॉस की स्थिति बन रही है। इसे रोकने के लिए शनिवार अपराह्न पौने तीन बजे से रात पौने नौ बजे तक तिलोथ विद्युत गृह में बिजली उत्पादन बंद कर मनेरी बैराज से फ्लशिंग करनी पड़ी। यह मलबा जोशियाड़ा बैराज तक पहुंचने पर रविवार को यहां भी फ्लशिंग करनी पड़ी। यहां रविवार सुबह दस बजे से अपराह्न साढ़े तीन बजे तक विद्युत उत्पादन बंद रहा।
आजकल गंगा भागीरथी में पर्याप्त पानी उपलब्ध होने के कारण 90 मेगावाट की मनेरी भाली प्रथम चरण परियोजना के तिलोथ विद्युत गृह में रोजाना 2.09 मिलियन यूनिट और 304 मेगावाट की मनेरी भाली स्टेज टू परियोजना के धरासू विद्युत गृह में 7.2 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन हो रहा है। फ्लशिंग के लिए घंटों उत्पादन बंद रहने के कारण जल विद्युत निगम को करीब ढाई मिलियन यूनिट की विद्युत उत्पादन हानि झेलनी पड़ी। गंगा भागीरथी में जमा मलबे के कारण बार-बार फ्लशिंग की नौबत आ रही है। अभी बीते दो जून को भी परियोजनाओं में फ्लशिंग के लिए उत्पादन बंद करना पड़ा था।
गंगा भागीरथी में जमा बाढ़ का मलबा बरसात सीजन में बहकर परियोजना के बैराज जलाशयों तक पहुंच रहा है, जिससे हेडलॉस की स्थिति बनने पर फ्लशिंग करनी पड़ रही है। फ्लशिंग के बाद अब दोनों परियोजनाओं से फुल लोड क्षमता पर विद्युत उत्पादन लिया जा रहा है।
-हर प्रसाद गुप्ता, उपमहाप्रबंधक जल विद्युत निगम