देश का अंतिम गांव पूरी तरह से बर्फ में दबा है। स्थिति यह है कि यहां सभी मकान बर्फ से ढके हैं और ढूंढे नहीं मिल रहे हैं।
देश के अंतिम गांव माण में बर्फ हटाने के लिए करीब एक माह का समय लग जाएगा। निचले क्षेत्रों में रहे रहे ग्रामीण अपने गांव माणा में मकानों की स्थिति का जायजा लेने पहुंच रहे हैं।
माणा गांव के कई ग्रामीण 15 अप्रैल को हनुमान चट्टी से कई हिमखंडों को पार कर गांव पहुंचे थे, लेकिन उन्हें अपने मकान ढूंढे नहीं मिले और वे वहां से लौट गए। माणा गांव निवासी कमल रावत भी बर्फ से हुए नुकसान को देखने के लिए यहां पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि गांव में इतनी बर्फ कभी नहीं देखी। पचास साल बाद ऐसी बर्फबारी देखी है। एक माह बर्फ हटाने में ही लग जाएगा। बदरीनाथ यात्राकाल में दूध का व्यवसाय करने वाले ग्रामीण हरीश का कहना है कि मवेशियों को छिनका से माणा गांव पहुंचाने की चिंता है।