कार नंबर से पकड़ में आए ठग
पुलिस ने ठगी के घटनास्थल के आसपास से सीसीटीवी कैमरे के फुटेज का निरीक्षण किया था। इसी दौरान कार का नंबर पुलिस के हाथ आ गया था। कार के नंबर के सहारे पुलिस टीम लखनऊ तक पहुंच गई। लखनऊ आरटीओ से पता मिलने के बाद पुलिस ने आरोपियों की घेराबंदी की। पड़ताल के बीच पता चला कि दोनों ठग जेवरात को बेचने कानपुर गए हैं। इसके बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
हरिद्वार में हुआ था प्रयास विफल
पुलिस के अनुसार रायबरेली के दोनों आरोपी लंबे समय से ठगी के धंधे में सक्रिय हैं। आरोपी 12 मार्च को लखनऊ से 13 मार्च की शाम हरिद्वार पहुंचे थे। होटल में रात बिताने के बाद 14 मार्च को हरिद्वार में ठगी का प्रयास किया था, लेकिन कामयाब नहीं हो पाए थे। 15 मार्च की सुबह वे कार से देहरादून आ गए। नेहरू कॉलोनी में कार को सड़क किनारे खड़ी कर शिकार की तलाश में लग गए। काफी देर के बाद पीड़ित महिला मिली। पति की बीमारी ठीक करने का झांसा देकर महिला के तमाम जेवरात उतरवा लिए थे। पुलिस ने बताया कि इनके खिलाफ रायबरेली और लखनऊ में ठगी के मुकदमे दर्ज हैं।
पुलिस टीम को मिला पुरस्कार
एसएसपी ने अनावरण टीम में शामिल नेहरू कॉलोनी थानाध्यक्ष दिलबर सिंह नेगी, वरिष्ठ उपनिरीक्षक राकेश शाह, उप निरीक्षक सुनील पंवार, कांस्टेबल दीप प्रकाश, गंभीर, विजय, मनमोहन, एसओजी कांस्टेबल आशीष और प्रमोद आदि को पुरस्कृत करने की घोषणा की है।