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उत्तराखंड में भी चला मोदी के मेक इन इंडिया का जादू

Fri, 26 Sep 2014 02:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया का असर उत्तराखंड में भी दिखाई दिया। मोदी ने उद्यमियों को देश छोड़कर न जाने को कहा तो प्रदेश में उद्यमियों को राज्य छोड़कर न जाने का सुझाव दिया गया। चिंता वाजिब भी है।
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सामान्य धारणा यह भी है कि विशेष औद्योगिक पैकेज की रियायतों के समाप्त हो जाने के बाद उद्योग प्रदेश से पलायन कर सकते हैं। लिहाजा प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया के मूलमंत्र के बीच राज्य संस्करण की जरूरत उत्तराखंड में भी महसूस की गई।

बृहस्पतिवार को राजपुर रोड स्थित एक होटल के सभागार में प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया के लाइव प्रसारण को देखने-सुनने के लिए कई उद्यमी जमा हुए। मोदी बोलते रहे और उद्यमी चुपचाप सुनते रहे। सहमति के बिंदु अधिक थे। पर मोदी उद्यमियों के दिल के तार छूने में सफल रहे।
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प्रदेश सरकार से नाराज द‌िखे उद्यमी

दूसरी ओर देश के लिए खींचा गया खाका उद्यमियों को उत्तराखंड की याद भी दिला गया। बाद में आयोजित पैनल डिस्कशन में चिंता, शिकवा, शिकायत, आशा एक साथ मूर्त हो गईं। अशोक लीलैंड पंतनगर के एचआर हेड देवेंद्र शर्मा ने कहा कि देहरादून से दिल्ली जाने में आठ घंटे लगते हैं और दिल्ली से चीन जाने में केवल पांच घंटे।

एक तरफ करीब तीन सौ किलोमीटर की दूरी है और दूसरी तरफ पांच हजार किलोमीटर। यह समस्या कैसे सुलझेगी। हनीवैल इलेक्ट्रिकल डिवाइस के प्लांट हेड अमित शर्मा ने कहा कि गुजरात में फैक्ट्री स्थापित करने में केवल नौ महीने का समय लगा था। उत्तराखंड में यह कल्पना की जा सकती है क्या?

उन्होंने कहा कि पासपोर्ट बनाने का काम सरकार नहीं बल्कि टाटा कर रहा है। अन्य मामलों को भी आउटसोर्स क्यों नहीं किया जाता।

उद्यमियों के मुताबिक लाल फीताशाही से बचना जरूरी है। बताया गया कि एक कारखाना लगाने के लिए 27 लाइसेंस की जरूरत होती है। सिंगल विंडो सिस्टम को पूरी तरह से प्रभावी होना चाहिए। अमृतसर कोलकाता कारिडॉर प्रदेश को छू रहा है। जल्द ही इसे पूरा होना चाहिए।
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पर मेक इन इंडिया की राह में अभी अड़चन

तस्वीर का दूसरा पहलू उद्योग निदेशालय के अपर निदेशक एससी नौटियाल ने सामने रखा। नौटियाल ने कहा कि उद्योगों को प्रदेश से नहीं जाना चाहिए। रियायत न मिले तो प्रदेश सरकार अपनी तरफ से रियायतें देने के लिए तैयार है। आटो सेक्टर की प्रदेश में जड़ें जम चुकी हैं पर फार्मा को लेकर परेशानी हो सकती है।

पैनल डिस्कशन में वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश, मुख्य सचिव सुभाष कुमार, अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा, प्रमुख सचिव एमएच खान को भी शामिल होना था। पर इनमें से कोई पहुंचा नहीं। कुछ उद्यमी इस बात पर असंतोष जाहिर करते हुए भी दिखे। साफ है कि मेक इन उत्तराखंड की राह में अभी कुछ अड़चन तो है ही।

चैंबर की रिपोर्ट में कई तथ्य पहले से शामिल
पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स के क्षेत्रीय निदेशक अनिल तनेजा के मुताबिक मेक इन इंडिया अभियान में शामिल की गई कई बातों पर चैंबर पहले ही उत्तराखंड सरकार का ध्यान आकृष्ट कर चुका है। चैंबर की रिपोर्ट में कहा गया है कि सुशासन, सिंगल विंडो आदि पर सरकार को फोकस करना होगा।
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