वर्ष का पहला मकर संक्रांति पर्व शनिवार को पड़ रहा है। देश के विभिन्न अंचलों से आए श्रद्धालु गंगा मैय्या में डुबकी लगाएंगे। मुख्य पर्वकाल सवेरे 7.32 बजे से दोपहर बाद 2.05 बजे तक बना रहेगा। मकर संक्रांति का स्नान यद्यपि पूरे दिन चलेगा। पर्वतीय अंचलों में मकर संक्रांति उत्तरायणी के रूप में मनाई जाती है।
गौरतलब है कि छह महीनों के दक्षिणायन से सूर्य नारायण इसी दिन उत्तर पूर्व की यात्रा प्रारंभ करते है। सूर्य के उत्तर की ओर आने से धरती पर तापमान में तिल तिल वृद्धि होती है। परंपराओं का निर्वहन करते हुए प्रतीक रूप में इस दिन तिल दान किया जाता है और तिल व गुड़ से बने पदार्थ खाए जाते हैं।
यह पर्व भी लोहड़ी की भांति अग्नि संस्कार का पर्व है। देश के जिन भागों में संक्रांति के हिसाब से सौर मास चलता है, वहां मकर संक्रांति से ही नव वर्ष प्रारंभ होगा।
हरिद्वार में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर प्रांतों से आए हजारों श्रद्धालु गंगा स्नान करेंगे। शुक्रवार की शाम तक हजारों की संख्या में पर्वतीय यात्रियों का आगमन हुआ है। मकर संक्रांति के दिन समीपवर्ती उत्तर प्रदेश, दिल्ली से भी श्रद्धालु गंगा नहाने पहुंचेंगे।
पहाड़ी महासभा मनाएगी मकर संक्रांति
पहाड़ी महासभा मकर संक्रांति का पावन पर्व शनिवार को भल्ला कालेज व ऋषिकुल मैदान में दो कार्यक्रमों का आयोजन कर मनाएगी। सायंकालीन संगीत संध्या में उत्तराखंड के प्रमुख गायक नरेंद्र सिंह नेगी अपनी प्रस्तुति देंगे। महंत रघुवीर दास के संरक्षण में आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला में अनेक खेलकूद प्रतियोगिताएं होगी और कई प्रमुख हस्तियों को सम्मानित किया जाएगा।