पंच बदरियों में से एक आदिबदरी नाथ मंदिर के कपाट शनिवार को ब्रह्ममुहूर्त में श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।
आयोजन के लिए समिति तैयारियों में जुटी है। मंदिर परिसर को फूलों से सजाया गया, तो देवी भागवत कथा के लिए मंडप बनाया गया है। परंपराओं के अनुसार साल में एक (पौष) माह के लिए मंदिर के कपाट बंद रहते हैं।
मकर संक्रांति के अवसर पर शनिवार को आदिबदरी मंदिर के कपाट खोले जाएंगे। मंदिर समिति के अध्यक्ष विजयेश नवानी ने बताया कि कपाट शनिवार सुबह ब्रह्ममुहूर्त में साढ़े चार बजे खुलेंगे। मंदिर के मुख्य पुजारी चक्रधर थपलियाल और अन्य पुजारियों की ओर से कपाट खुलने के बाद भगवान आदिबदरी नाथ को सप्त सिंधु जल से स्नान कराया जाएगा।
इसके बाद पीत वस्त्र सहित शृंगार की प्रक्रिया पूरी होगी। इस दौरान भगवान को एक किलो का चांदी का छत्र भी चढ़ाया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालु भगवान आदिबदरी नाथ के दर्शन कर सकेंगे।
मंदिर समिति संरक्षक नरेंद्र चाकर ने बताया कि कपाटोद्घाटन के साथ ही नौ दिवसीय श्रीमद् देवीभागवत कथा का आयोजन भी शुरू होगा। इसके लिए गढ़वाल कीर्तन मंडप में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। वहीं समारोह में महिला मंगल दल धार्मिक लोक प्रस्तुतियां भी देंगे।
मां चंडिका मंदिर के कपाट होंगे बंद
सिमली स्थित सिद्धपीठ मां चंडिका मंदिर के कपाट एक माह के लिए श्रद्धालुओं के लिए बंद होंगे। यहां मकर संक्रांति के अवसर पर माघ माह के लिए मंदिर के कपाट बंद होते हैं। मंदिर समिति के अध्यक्ष नत्था सिंह नेगी ने बताया कि मंदिर में देवी चंडिका की पूजा के बाद कपाट बंद किए जाएंगे।