कई वर्षों के बाद भगवान शिव का प्रिय पर्व प्रदोष उन्हीं के अन्य प्रमुख पर्व महाशिवरात्रि के दिन पड़ रहा है। देशभर में गंगाजल लेकर पहुंचे कांवड़िए इसी दिन महारुद्र का जलाभिषेक करेंगे। पवित्र श्रवण नक्षत्र में दो पर्व एक साथ पड़ने से शिवभक्त आनंदित हो उठे हैं।
माह में दो बार आता है प्रदोष
आमतौर पर द्वादशी एवं त्रयोदशी तिथियों के मिलन पर भगवान शिव का प्रदोष व्रत प्रतिमाह दो बार रखा जाता है। इस बार द्वादशी तिथि 26 फरवरी बुधवार को अर्द्धरात्रि 11:44 बजे तक बनी रहेगी। उससे कई घंटे पहले सूर्य अस्त हो चुका होगा।
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त्रयोदशी तिथि 27 फरवरी गुरूवार को पूरे दिन रहेगी और श्रवण नक्षत्र में सूर्यास्त के बाद रात 8:18 बजे तक बनी रहेगी। फलस्वरूप प्रदोष व्रत 27 फरवरी को रखा जाएगा। 27 को ही महाशिवरात्रि की चार पहर पूजा होगी। कई वर्षों के बाद ऐसा संयोग होने से इस बार महाशिवरात्रि का महत्व और भी बढ़ गया है।
धार्मिक महत्व
मान्यता है कि भगवान शंकर के प्राकट्य और विवाह तिथियों पर भी ये दोनों पर्व एक साथ पड़े थे। कुछ वर्षों के बाद ऐसा संयोग तिथियों के बीच होता आया है।
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महाशिवरात्रि की अर्द्धरात्रि पूजा का मुहूर्त 27 फरवरी को 11:22 बजे से प्रारंभ हो जाएगा और पूरी रात बना रहेगा। यद्यपि शिव जलाभिषेक प्रात:काल से शुरू होगा।