अनेक स्थानों से श्रद्धालु जलाभिषेक करने हैं पहुंचते
मंदिर पर सावन के सोमवार को अनेक भंडारों का आयोजन भी किया जाता है। यहां मुख्य रूप से इलायची दाने का प्रसाद चढ़ाया जाता है। पुजारी पंडित अरविंद शर्मा ने बताया की शिवरात्रि के दिन यहां अनेक स्थानों से श्रद्धालु जलाभिषेक करने आते हैं।
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मंदिर के पास था प्राचीन कुआं
प्राचीन शिव मंदिर के पास एक पुराना कुआं भी था। जिस पर वर्षों पहले सीमली गांव के अलावा आसपास के गांव के ग्रामीण भी पानी लेने के लिए आते थे। कई बार क्षेत्र में सूखा पड़ने की स्थिति पैदा हुई। लेकिन अब तक कभी भी कुएं का पानी नहीं सूखा। लेकिन कुछ वर्ष पहले कुआं बंद कर उसके ऊपर माता काली के मंदिर का निर्माण कर दिया गया है।