उत्तर भारत का सुप्रसिद्ध मां पूर्णागिरि धाम अटूट आस्था, श्रद्धा का केंद्र है। मां के दर्शन से भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है।
देश-विदेश से लोग मां पूर्णागिरि के दर्शन को आते हैं। धाम का महात्म्य मां पार्वती की सती गाथा से जुड़ा है। इस धाम को माता सती की नाभि स्थली के रूप में पूजा जाता है। उत्तराखंड प्रदेश के चंपावत जिले में टनकपुर से करीब 22 किमी दूर पर्वत श्रृंखलाओं की चोटी पर स्थापित मां पूर्णागिरि धाम स्थापित है।
मान्यता है कि जब राजा प्रजापति दक्ष ने यज्ञ आयोजित कर भगवान शिव का अपमान किया तो मां पार्वती यज्ञकुंड में कूदकर सती हो गई थी और क्रोधित भगवान शिव देवी सती के शरीर को लेकर ब्रह्मांड में विचरण करने लगे। इस दौरान जहां-जहां देवी सती के अंग गिरे कालांतर में वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई।
मां पूर्णागिरि धाम भी इन्हीं शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। आस्था, विश्वास के इस धाम में उत्तर भारत ही नहीं देश-विदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन को पहुंचते हैं। धाम के एक, जहां शांतरूप में बहती शारदा तो दूसरी ओर विहंगम प्राकृतिक दृश्य श्रद्धालुओं की भक्तिरस का अनूठा आनंद प्रदान करते हैं।