हरियाली ही हरियाली और उसके बीच से कैलास जाने का मार्ग जिसपर मायके से सजी संवरी नंदा ससुराल जा रही है, लेकिन रास्ते में कई दैत्य आकर मां नंदा का मार्ग रोक देते हैं।
यही नहीं नंदा के सौंदर्य को देख वे उनपर मोहित हो जाते हैं। तब यहां शिव अपने गण माल को भेजते हैं। माल और मां नंदा कई रूप धारण कर दैत्यों को छकाकर आगे बढ़ जाती है।
इस पौराणिक किवदंती को जीवंत किया श्रीनंदा देवी राजजात यात्रा के दौरान घतौड़ा गांव के मल्ल युद्ध ने। बताया जाता है कि मां नंदा के पीछे भागते हुए दैत्य घतौड़ा गांव से एक किमी दूर तालाब में थे।
राजजात यात्रा पांचवें पड़ाव कोटी से छठवें पड़ाव भगोती की ओर आगे बढ़ती है। यहां से करीब तीन किमी खड़ी चढ़ाई पार कर घतौड़ा गांव है जो मां नंदा के कैलास यात्रा के दौरान दैत्यों द्वारा मां नंदा को अपने कब्जे में रखने की किवदंती का गवाह है।