कोर्ट को सरकार की ओर से बताया गया कि सरकार के समक्ष यह मामला विचाराधीन है। न्यायालय ने माना कि यह मामला जनहित से संबंधित है। कोर्ट ने यह भी माना कि उत्तराखंड राज्य ने यूपी के बनाये उस कानून को अंगीकृत नहीं किया है। इसलिए इसे उत्तराखंड पर लागू नहीं किया जा सकता। अत: अग्रिम जमानत संबंधी दंड प्रक्रिया के प्रावधान उत्तराखंड में प्रभावी होंगे।
अधिवक्ताओं के मुताबिक अब तक किसी भी प्रकृति के अपराध में आरोपित को गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी लगानी पड़ती थी। अब पुलिस में मामला दर्ज होने के बाद कोई भी आरोपित निचली अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल कर अंतरिम जमानत ले सकता है।