हालात यह हो गए कि अब कर्मकार बोर्ड केवल श्रमिकों के बच्चों के विवाह और पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति जैसे कार्यों तक सीमित रह गया है। कोरोना महामारी के दौरान श्रमिकों को राशन बांटने का काम भी एक बार ही हो पाया। पिछले साल सितंबर-अक्तूबर में नया बोर्ड भी भंग हो गया था।
तब से लेकर आज तक बिना बोर्ड सदस्यों के ही कर्मकार बोर्ड चल रहा है, जिसके अध्यक्ष की जिम्मेदारी श्रम सचिव चंद्रेश कुमार पर है। बोर्ड की सचिव मधु नेगी चौहान से इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने कहा कि अभी बोर्ड अस्तित्व में नहीं है। बोर्ड ही हर तरह की खरीद पर फैसला लेता है।
बोर्ड में साइकिल आवंटन की होगी एसआईटी जांच
कर्मकार बोर्ड में साइकिलों के आवंटन में सवाल खड़े होने के बाद जिलाधिकारियों के स्तर से जांच हुई थी। हरिद्वार के डीएम ने इस मामले में एसआईटी जांच की सिफारिश की थी। अब मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित सतर्कता समिति ने साइकिल आवंटन की एसआईटी जांच का निर्णय लिया है।
साइकिलों का वितरण सही ढंग से नहीं हुआ था। जिलाधिकारियों की रिपोर्ट में भी यह साफ हुआ था कि साइकिलें हासिल करने वालों का सत्यापन नहीं हो रहा है। लिहाजा, इसकी एसआईटी जांच का निर्णय लिया गया है। - चंद्रेश कुमार, सचिव, श्रम एवं अध्यक्ष कर्मकार बोर्ड