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मतदान के आंकड़ों ने बढ़ाई नेताओं की चिंता

Tue, 13 May 2014 04:39 PM IST
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून
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लोकसभा में बढ़े मत प्रतिशत को भले ही भाजपाई अपने हक में देख रहे हो लेकिन कई दिग्गजों के क्षेत्र में अप्रत्याशित रूप से मतदान कम होना हैरत में डालता है।
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ऐसा यदि बड़े ओहदेदारों के क्षेत्र में हो तो राजनीतिक रूप से फर्क भी पड़ता है। इसी तरह का मामला हुआ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत व नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट के विधानसभा क्षेत्रों में।

बदरीनाथ में बंपर वोटिंग

मजे की बात यह है कि बदरीनाथ जैसी विधानसभा सीटों पर बम्पर मतदान हुआ लेकिन इन दोनों नेताओं की विधानसभा सीट पर बेहतर प्रदर्शन नहीं होना कुछ संकेत जरूर देता है।

इसे देखकर यह भी कहा जा सकता है कि इन क्षेत्रों में मोदी की लहर का प्रभाव नहीं पड़ा।

मतदान के बाद पार्टी के बड़े नेताओं की अपनी विधानसभा सीटों में परफोरमेंस को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

बड़े ओहदेदारों के लिए अलार्मिंग स्टेज

खासतौर पर जो बड़े ओहदेदार है उनके लिए यह अलार्मिंग स्टेज है। जब पहाड़ पर वोट बरस रहे थे तब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत केविधानसभा क्षेत्र चौबट्टाखाल में मात्र 48 प्रतिशत मतदान ही हुआ।

जबकि यमकेश्वर व पौड़ी जैसी पर्वतीय विस सीटों पर यह प्रतिशत पचास से भी ज्यादा गया। नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट की सीट रानीखेत पर भी मात्र पचास प्रतिशत ही मतदान हुआ।
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अल्मोड़ा में 60 व चम्पावत में 55 प्रतिशत मतदान

जबकि अल्मोड़ा व चम्पावत जैसी पर्वतीय विस सीटों पर वोटों की जमकर बारिश हुई। अल्मोड़ा में 60 प्रतिशत व चम्पावत में 55 प्रतिशत मतदान हुआ। और ये दोनों ही बड़े नेता है और दोनों को पार्टी ने अहम जिम्मेदारी दे रखी है।

इस मामले में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल का प्रदर्शन बेहतर रहा और उनकी विस सीट डीडीहाट में 54 प्रतिशत मतदान हुआ।
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