जंगली जानवरों की वजह से कोई भी नुकसान हुआ है तो आपको वन विभाग से मुआवजा लेने का अधिकार है।
वन विभाग के पास पर्याप्त बजट होता है। वर्ष 2012 में सरकार ने मानव वन्यजीव संघर्ष राहत वितरण निधि नियमावली को संशोधित करने के साथ ही मुआवजे की राशि बढ़ा दी है।
पालतू जानवर या इंसानी हानि की स्थिति में मुआवजा लिया जा सकता है। शासनादेश के तहत हर डीएफओ के खाते में मुआवजे के लिए 20 लाख रुपए सालाना रखे जाते हैं।
डीएफओ को एक बार में इतनी ही रकम बतौर मुआवजा देने का हक है। ध्यान रखें कि मुआवजे की मांग के पीछे झूठी कहानी हुई तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज हो सकता है।
इन जानवरों से नुकसान पर मुआवजा
- सांप के काटने, तेंदुओं, हिम तेंदुआ, जंगली हाथी, भालू, लकड़बघा, जंगली सुअर, मगरमच्छ/घड़ियाल के हमले में मौत या घायल होने पर।
- इन जानवरों के हमले में पालतू पशुओं की मौत होने पर।
- जंगली हाथी, जंगली सुअर, नील गाय, काकड़, सांबर, चीतल और बंदरों से फसल को नुकसान होने पर।
- जंगली हाथियों से मकान को क्षति होने पर।
इतना मिलता है मुआवजा
मानव
साधारण घायल : 15 हजार रुपए
गंभीर घायल : 50 हजार रुपए
आंशिक रूप से अपंग : एक लाख रुपए
पूर्ण अपंग : दो लाख रुपए
मौत होने पर : तीन लाख रुपए
पालतू पशुओं की मौत पर
गाय : 15 हजार रुपए
घोड़ा या खच्चर : 40 हजार रुपए
तीन साल से बड़ा बैल : 15 हजार रुपए
तीन साल से बड़ी भैंस : 15 हजार रुपए
एक से दो साल तक का गाय या भैंस का बच्चा : एक हजार रुपए
दो से तीन साल तक का गाय या भैंस का बच्चा : दो हजार रुपए
एक साल से कम का बच्चा : 500 रुपए
बकरी या भेड़ के मरने पर : तीन हजार रुपए