खेलों के मामले में देहरादून को फुटबॉल के गढ़ में जाना जाता है। हर साल डिस्ट्रिक्ट फुटबॉल लीग समेत विभिन्न फुटबॉल प्रतियोगिताएं इसकी तस्दीक भी करती हैं।
कई वॉलीबाल क्लब सक्रिय थे
लेकिन फुटबॉल से पहले वॉलीबाल दून की शान और पहचान हुआ करता था। आज के फुटबॉल क्लबों की तरह तब पूरे जिले में कई वॉलीबाल क्लब सक्रिय थे। खिलाड़ी पैसा न मिलने के बावजूद सिर्फ नाम और सम्मान के लिए दूरदराज के क्षेत्रों से टूर्नामेंटों में जुटते थे।
आलम यह था कि 60-70 के दशक में वॉलीबाल के कद्रदान मैच देखने के लिए डोईवाला से पैदल ही दून तक पहुंच जाते थे। वक्त के साथ दर्शक कम हुए, खिलाड़ियों का रुझान भी घट गया तो टूर्नामेंट भी बंद होने लगे।
अब डोईवाला का फ्रेंड्स क्लब ही दून की वॉलीबाल की विरासत को संजोए हुए है। जिला वॉलीबाल एसोसिएशन के सचिव भरतवीर सिंह बताते हैं कि वह 1962 में दून आए थे। तब यहां क्लब स्तर पर प्रतियोगिताएं होती थीं। 15-16 क्लब थे।
ब्रदर्स क्लब परेड ग्राउंड और फ्रेंड्स क्लब डोईवाला तब की दिग्गज टीमें थीं। पवेलियन ग्राउंड में तब वॉलीबाल के आल इंडिया लेवल के टूर्नामेंट होते थे, जहां दर्शकों की भी जबर्दस्त भीड़ रहती थी। 1970 में क्लबों के खिलाड़ियों का चुनकर जिले की पहली टीम बनी, जिसने 75 में पहला स्टेट खेला।
टीम ने 82 में पहला खिताब भी हासिल किया। 1995 में जिला एसोसिएशन भी बनी, लेकिन वक्त के साथ क्लब घटते चले गए। अब सिर्फ फ्रेंड्स क्लब ही हर साल वालीबाल प्रतियोगिता कराता है।
यहां थे क्लब
डोईवाला, राजपुर, रायपुर, बद्रीपुर, प्रेमनगर, भानियावाला
ये टूर्नामेंट अब बंद
- इंदिरा गांधी मेमोरियल आल इंडिया वॉलीबाल टूर्नामेंट
- केशव देव प्राइज मनी वॉलीबाल टूर्नामेंट